नई दिल्ली: देश में E-20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर यह पूछा है कि अगर E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से पुराने वाहनों की माइलेज कम होती है या उनके किसी पुर्जे को नुकसान पहुंचता है, तो क्या कंपनियां ग्राहकों को मुआवजा देंगी? नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने सभी 29 वाहन निर्माता कंपनियों को पत्र भेजा है। इसके अलावा मारुति, टोयोटा और हीरो को अलग से भी पत्र लिखा है।
‘कंपनियों के दावों में विरोधाभास’
केजरीवाल ने कहा कि इन मारुति, टोयोटा और हीरो ने पहले सरकार की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि E-20 पेट्रोल से पुराने वाहनों को कोई समस्या नहीं होगी। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,
‘इन कंपनियों की ओर से जारी ओनर मैनुअल में साफ लिखा गया है कि पुराने वाहनों में E-10 (10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) से ज्यादा एथेनॉल वाला पेट्रोल इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसे में कंपनियों के सार्वजनिक दावों और उनके आधिकारिक निर्देशों में विरोधाभास दिखाई देता है।’
केजरीवाल ने कंपनियों से 2 सवाल पूछे
केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने कंपनियों से 2 सीधे सवाल पूछे हैं। पहला, यदि E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से किसी वाहन की माइलेज में 5 प्रतिशत से अधिक की कमी आती है या किसी पुर्जे को नुकसान होता है, तो क्या कंपनी इसकी भरपाई करेगी? दूसरा, कंपनियां स्पष्ट करें कि क्या वर्ष 2023 से पहले बने उनके सभी वाहनों में E-20 पेट्रोल सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि हां, तो किसी भी नुकसान या माइलेज में कमी आने पर क्या कंपनी ग्राहकों को मुआवजा देगी?
पेट्रोलियम मंत्री ने जारी किया था बयान
इस पूरे विवाद पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि E-20 पेट्रोल को लेकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि E-20 से संबंधित समस्याओं की खबरें वास्तविकता को गलत तरीके से पेश कर रही हैं। पुरी ने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियां और वाहनों की सर्विस करने वाले विशेषज्ञ लगातार कह रहे हैं कि E-20 पेट्रोल से कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब सभी पक्ष इसे स्वीकार कर चुके हैं, तो अचानक इस मुद्दे को लेकर इतनी चिंता क्यों दिखाई जा रही है।
एथेनॉल को लेकर क्या है सरकार का लक्ष्य?
भारत सरकार का लक्ष्य एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत पूरे देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण लागू करना है। सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी एथेनॉल उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय मिलेगी। सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया तकनीकी आंकड़ों और उद्योग से मिले सुझावों के आधार पर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है।
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