उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज डिवीजन ने बॉडी वॉर्न कैमरा (Body Worn Camera) पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कर दी है। इस नए सिस्टम के तहत, टिकट चेकिंग कर्मचारी (TTE) ड्यूटी के दौरान बॉडी वॉर्न कैमरा पहनकर टिकट की जांच करेंगे, जिससे टिकट जांच के दौरान होने वाली प्रत्येक गतिविधि रिकॉर्ड होगी। ये पायलट प्रोजेक्ट उत्तर मध्य रेलवे के जनरल मैनेजर नरेश पाल सिंह के खास निर्देशों के बाद 24 जुलाई से शुरू की गई है।
फिलहाल 2 ट्रेनों में बॉडी कैमरा लगाकर ड्यूटी करेंगे टीटीई
पहले चरण में प्रयागराज मंडल की दो प्रमुख प्रीमियम ट्रेनों प्रयागराज एक्सप्रेस और श्रमशक्ति एक्सप्रेस में ड्यूटी करने वाले टिकट चेकिंग कर्मचारियों को बॉडी वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए गए हैं। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता और प्राप्त अनुभवों के आधार पर प्रयागराज मंडल से चलने वाली अन्य ट्रेनों में भी टीटीई को बॉडी वॉर्न कैमरा दिए जाएंगे।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं टीटीई को दिए गए बॉडी वॉर्न कैमरा
रेलवे द्वारा उपलब्ध कराए गए बॉडी वॉर्न कैमरे अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं, जिनमें HD वीडियो रिकॉर्डिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, नाइट विजन, लंबा बैटरी बैकअप और टैंपर-प्रूफ रिकॉर्डिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
निराधार और फर्जी शिकायतों पर लगेगी रोक
टिकट जांच के दौरान कई बार यात्रियों और टीटीई के बीच विवाद और शिकायतें उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसी परिस्थितियों में कैमरे में उपलब्ध रिकॉर्डिंग निष्पक्ष और विश्वसनीय साक्ष्य के रूप में काम करेगी, जिससे वास्तविक तथ्यों के आधार पर शिकायतों का तेज और निष्पक्ष निस्तारण संभव होगा। इससे निराधार और फर्जी शिकायतों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इसके साथ ही अगर किसी यात्री के साथ अनुचित व्यवहार अथवा किसी कर्मचारी के साथ अभद्रता, दुर्व्यवहार या मारपीट जैसी घटना होती है, तो उसकी सत्यता का भी निष्पक्ष परीक्षण किया जा सकेगा।
टिकट चेकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही होगी मजबूत
ये सिस्टम टिकट चेकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिक आचरण को और ज्यादा मजबूत बनाएगी। इसके साथ ही यात्रियों और टीटीई दोनों में सुरक्षा की भावना को बढ़ावा मिलेगा तथा टिकट जांच के दौरान अनुशासन एवं शालीन व्यवहार को प्रोत्साहन प्राप्त होगा।
TTE को दिए गए बॉडी कैमरा से क्या-क्या होंगे फायदे
- टिकट चेकिंग प्रक्रिया का निष्पक्ष और डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
- यात्रियों और टीटीई दोनों के हितों का समान रूप से संरक्षण होगा।
- फर्जी शिकायतों और अनावश्यक विवादों में कमी आएगी।
- शिकायतों और अपीलों के निस्तारण में साक्ष्य आधारित एवं त्वरित फैसले लिए जा सकेंगे।
- कर्मचारियों के कार्य निष्पादन, व्यवहार और सेवा गुणवत्ता का ज्यादा प्रभावी मूल्यांकन संभव होगा।
- सुरक्षा संबंधी घटनाओं, संदिग्ध गतिविधियों अथवा कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में उपलब्ध वीडियो फुटेज रेलवे सुरक्षा बल (RPF) एवं अन्य जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य सिद्ध होगी।
- यात्रियों का रेलवे के प्रति विश्वास और ज्यादा मजबूत होगा तथा रेलवे की सकारात्मक छवि को बढ़ावा मिलेगा।
- डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग से रेलवे प्रशासन में सुशासन (Good Governance), पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को और अधिक मजबूती मिलेगी।
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