भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, नेपाल के दौरे पर जाने वाले हैं। इंडियन आर्मी चीफ का ये दौरा दोनों देशों के रिश्ते के लिहाज अहम होगा। बता दें कि 16 अगस्त से शुरू होने वाली 4 दिन की इस यात्रा के दौरान, उम्मीद है कि जनरल धीरज सेठ को नेपाल की सेना के ‘जनरल’ का मानद पद दिया जाएगा। इसके जरिए दोनों देशों के बीच चली आ रही पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया जा सकता है।
नेपाली लीडरशिप संग बैठक कर सकते हैं जनरल धीरज सेठ
हालांकि, रस्मी बातों से हटकर भी भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के इस दौरे का रणनीतिक महत्व काफी है। बताया जा रहा है कि जनरल धीरज सेठ नेपाल की लीडरशिप के साथ हाई लेवल मीटिंग्स भी करेंगे।
क्यों अहम मानी जा रही भारतीय सेना प्रमुख की नेपाल यात्रा?
एक अहम प्रश्न यह भी होगा कि क्या इंडियन आर्मी में गोरखाओं की भर्ती, खासकर ‘अग्निवीर’ स्कीम के अंतर्गत नेपाली गोरखाओं की भर्ती के भविष्य को लेकर चर्चा होगी। यह मुद्दा इस वक्त इसलिए भी खासतौर पर अहम है क्योंकि नेपाल में पूर्व गोरखा सैनिकों ने हाल ही में अग्निपथ स्कीम के तहत इंडियन आर्मी में भर्ती फिर से शुरू करने, कालापानी और दूसरे रणनीतिक रूप से अहम मुद्दों पर मांग उठाई थी।
गोरखा भर्ती और अग्निपथ स्कीम पर हो सकती है बात
इसलिए, यह सबसे ऊंचे के सैन्य स्तर पर पहली बड़ी ऑफिशियल बातचीत हो सकती है, जिसमें गोरखा भर्ती के पुराने रिश्ते और अग्निपथ फ्रेमवर्क के तहत इसके फ्यूचर पर चर्चा हो सकती है।
भारत-नेपाल के बीच गोरखा कनेक्शन है महत्वपूर्ण
जान लें कि गोरखा कनेक्शन भारत-नेपाल के बीच सबसे मजबूत और लंबे वक्त से चले आ रहे सैन्य संबंधों में से एक रहा है, जिससे भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का दौरा सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात से कहीं अधिक अहम हो जाता है।
लिपुलेख मामले पर भारत ने नेपाल को दिया था जवाब
इससे पहले, लिपुलेख मामले पर भारत ने नेपाल को जवाब दिया था कि ये 1954 से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुराना मार्ग है। भारत का रुख इस संबंध में एक जैसा और स्पष्ट रहा है। 1954 से ही लिपुलेख दर्रा, कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पुराना रास्ता रहा है। इस रास्ते से यात्रा दशकों से चल रही है।






































