चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने सप्लाई को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सितंबर 2026 से चीनी मिलों को हर महीने की जगह हर 15 दिन में बिक्री का कोटा दिया जाएगा। सरकार का मकसद बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और जमाखोरी या कमी होने की स्थिति को रोकना है। सरकार ने साफ किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है।
अभी तक मिलता था महीने का कोटा
फिलहाल खाद्य मंत्रालय चीनी मिलों को पूरे महीने के लिए बिक्री का कोटा आवंटित करता है। सरकार की स्टॉक जांच में कुछ मिलों के पास घोषित मात्रा से ज्यादा चीनी मिली, जबकि कुछ मिलों ने आवंटित कोटे से कम चीनी बेची। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ मामलों में महीने की शुरुआत में बेची गई चीनी को खरीदारों ने महीने के अंत में उठाया। इससे बाजार में अस्थायी रूप से सप्लाई कम हुई ।
अब हर 15 दिन में होगा कोटा
नए नियम के तहत सितंबर से मिलों को पखवाड़े के आधार पर बिक्री कोटा मिलेगा। मिलों को आवंटित मात्रा का कम से कम 40 फीसदी पहले हफ्ते में बेचना होगा और बाकी मात्रा अगले हफ्ते में बेचनी होगी। इसके अलावा, मिल से चीनी बेचने के बाद उसे 7 दिनों के भीतर डिस्पैच करना जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि इससे सप्लाई चेन में तेजी आएगी और बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर होगी।
चीनी के दाम भी घटने लगे
सरकार के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में चीनी के एक्स-मिल दाम करीब 20 फीसदी घटे हैं और खुदरा कीमतों में भी नरमी शुरू हो गई है। सरकार का कहना है कि सप्लाई सामान्य रहने पर खुदरा कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्र ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति भी दी है। इसके अलावा डीलर्स और बड़े खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट लागू की गई है, जबकि चीनी के निर्यात पर पहले से रोक है।
फेस्टिव सीजन से पहले बढ़ेगी सप्लाई
सरकार ने कहा है कि अक्टूबर से शुरू होने वाले नए मार्केटिंग वर्ष में गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होगी। अक्टूबर में 10 लाख टन से ज्यादा चीनी उत्पादन का अनुमान है। नवंबर में करीब 45 लाख टन उत्पादन होने की उम्मीद है।
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