प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वडोदरा में युवाओं से बात की। हजारों युवा हाथ में फोन लेकर खड़े थे। बीच में बने रैंप से मोदी की entry भी रॉकस्टार के स्टाइल में हुई। बैकग्राउंड में ‘धुरंधर’ फिल्म का गाना बज रहा था। पहली बार मोदी के प्रोग्राम का रजिस्ट्रेशन Book My Show online के ज़रिए हुआ। एक घंटे में सारी सीटें बुक हो गईं, 42 हजार युवा वेंटिंग लिस्ट में थे। इसके बाद बुकिंग बंद करनी पड़ी।
पीएम मोदी ने कहा, देश के युवा अब ‘झूठ की गूंज’ के चक्कर में फंसने वाले नहीं है, फूफा मुंह फुलाए बैठे हैं, नकारात्मकता फैलाने लगे हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, आत्मनिर्भरता की ओर भारत अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने करीब 35 हज़ार करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उनमें सबसे महत्वपूर्ण था, वडोदरा से मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक dedicated freight corridor का उद्घाटन। इस रूट पर double stack container मालगाड़ी चलेगी।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार देश में world-class हाइवे और रेल रूट बना रही है, देश पूरी रफ्तार में दौड़ रहा है, लेकिन कुछ नाराज़ फूफा हैं, जो हर वक्त मुंह फुलाए बैठे रहते हैं, उन्हें हर अच्छे काम में कमी ढूंढने का रोग है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस के ज़माने में सिर्फ घोषणाएं होती थी, सारे ऐलान फाइलों में दबे रहते थे, लेकिन अब बुलेट ट्रेन की स्पीड से काम होता है, ये बात जिन लोगों को नहीं पचती, वो झूठ की गूंज का सहारा लेते हैं।
कल वडोदरा में और उससे पहले SRCC में ये तो साफ दिखाई दिया कि मोदी young minds से सीधे connect करने का प्रयास कर रहे हैं। मोदी को इस बात का एहसास है कि पहले पेपर लीक, फिर परीक्षा कैंसिल और अब छात्रों के रहने की हालत जैसी समस्याओं ने युवाओं को परेशान किया है। मोदी ने युवाओं को विश्वास दिलाया कि वो इन समस्याओं से वाकिफ हैं, जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करने वालों की सारी मांगें मान ली गईं। परीक्षा प्रणाली को दुरुस्त बनाने के लिए एक्सपर्ट्स कमेटी काम में लगी है। दिल्ली में गैरकानूनी तरीके से बनी इमारतों पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है।
इसके साथ-साथ मोदी छात्रों और युवाओं को ये भी बताते हैं कि किसी ‘फूफाजी’ की बातों में आने की ज़रूरत नहीं है। नाराज़ होना ‘फूफाजी’ की आदत हो गई है। उन्हें तो हर बात नेगेटिव नज़र आती है। मोदी का युवाओं से connect का एक और point ये भी है कि वह AI, IT, space, data centre, semiconductor जैसे नए ज़माने के sectors को लेकर अपना action plan बताते हैं, अपनी सरकार की रफ़्तार का ज़िक्र करते हैं और नौजवानों को यक़ीन दिलाते हैं कि आने वाले दिनों में और भी बड़े अवसर मिलेंगे।
मोदी ने Youth India से connect करना कोई अभी शुरू नहीं किया। वो बरसों से परीक्षा पर चर्चा करते रहे हैं, खिलाड़ियों के साथ interaction करते रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि मोदी ने युवाओं से उन्हीं की भाषा में बात करना सीख लिया है। इसका असर दिखाई देगा।
दिल्ली में एक्शन शुरू, लेकिन परेशान छात्रों के रहने का इंतज़ाम कैसे होगा
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी हॉस्टल की बिल्डिंग गिरने के बाद सरकार एक्शन में आ गई है। आज दो और गिरफ्तारियां हुई। पीजी चलाने वाले ऑपरेटर और ठेकेदार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आज ही इस इमारत से सटी दूसरी बिल्डिंग को गिराने का काम भी शुरू हो गया।
दिल्ली सरकार राजधानी में चल रहे हॉस्टल्स और PG को रेगुलेट करने के लिए नया कानून बनाएगी। नए कानून का ड्राफ्ट शहरी विकास मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में एक कमेटी तैयार करेगी। नया PG कानून दो महीने के भीतर विधानसभा में पेश होगा। इस बीच लक्ष्मी नगर, ललिता पार्क, शकरपुर में हॉस्टल्स और PGs का इंस्पेक्शन शुरू हो गया है। नगर निगम के अफसर हर हॉस्टल में जाकर फायर एनओसी, हॉस्टल की परमिशन से जुड़े कागजात देख रहे हैं और बिल्डिंग की मजबूती का जायजा ले रहे हैं। जो बिल्डिंग कमजोर हैं, उनको सील किया जा रहा है।
MCD के जूनियर इंजीनियर जब एक हॉस्टल में पहुंचे तो वहां देखा, हर फ्लोर पर दस-दस कमरे बनाए गए थे, हर कमरे में तीन-तीन बेड लगाए गए थे, दो रूम के बीच दीवार ही नहीं थी, प्लाइवुड से हर रूम का पार्टिशन बना हुआ था। MCD ने कल ही 35 PG को नोटिस दे दिये। अगर इन हॉस्टल्स में व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं तो इन्हें सील किया जाएगा। MCD के अफसरों ने तीन जोन्स में चलने वाले प्राइवेट हॉस्टल्स और PGs पर रेड की। 51 इमारतों को खतरनाक पाया, इनमें से 27 इमारतों को तुरंत तोड़ने के आदेश जारी किया गया।
मुश्किल ये है कि PG और हॉस्टल्स के मालिक इस तरह की खतरनाक इमारतों को भी तोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। कई इलाकों में MCD के अफसरों को हॉस्टल चलाने वालों के विरोध का सामना करना पड़ा। इस वक्त सबसे ज्यादा मुसीबत उन छात्रों के लिए है जो खतरनाक पीजी इमारतों में रह नहीं सकते और तुरंत दूसरा रूम मिलना आसान नहीं है। छात्रों ने जो पैसा एडवांस के तौर पर जमा किया था, पीजी मालिक वो पैसा लौटाने से इनकार कर रहे हैं।
पिछले तीन दिन में हमने देखा कि दिल्ली में hostels सीमित हैं और छात्र डिब्बों जैसे कमरों में रहने को मज़बूर हैं। दूसरी बात, जहां वो रहते हैं वो इमारतें ख़तरनाक हैं, कभी भी गिर सकती हैं, वहां न ventilation है, न बचाव का इंतज़ाम, पर किराया मनमाना वसूला जा रहा है। तीसरी बात ये कि ये सब अब तक इसलिए चलता रहा क्योंकि इस लूट में पूरा सिस्टम शामिल था। अब अगर सरकार, MCD, पुलिस की आंखें खुली हैं और एक्शन होता है, तो ये अच्छी बात है लेकिन सत्य निकेतन के पाप को isolation में नहीं देखा जाना चाहिए। एक तो ऐसी इमारतों के ख़िलाफ़, वो जिस भी इलाके में हों, बुलडोज़र वाला एक्शन हो, साथ-साथ एक plan भी बने कि दिल्ली आकर रहने वाले छात्रों के लिए रहने का इंतज़ाम क्या हों।
महाराष्ट्र : गरबा पर राजनीति क्यों?
महाराष्ट्र में नवरात्र शुरू होने से पहले विश्व हिंदू परिषद ने सामूहिक गरबा के organizers के लिए गाइडलाइन्स जारी की है। इसमें गरबा पंडालों में मुसलमानों को प्रवेश न देने के लिए कहा गया है, गरबा में आने वालों का आधार कार्ड चेक होगा, आधार कार्ड दिखाने के बाद पंडाल में जाने वाले सभी लोगों को कलावा बांधा जाएगा, तिलक लगाया जाएगा। VHP के प्रवक्ता ने कहा कि गरबा नवरात्र के दौरान एक धार्मिक उत्सव है, जिसमें देवी की मूर्ति की पूजा पाठ की जाती है, ये आस्था से जुड़ा मामला है, कोई मनोरंजन की जगह नहीं है।
विश्व हिन्दू परिषद के लोग हर साल इस तरह की गाइडलाइन्स जारी करते हैं, ये कोई नई बात नहीं है। नई बात ये है कि पहली बार उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने VHP की इस मुहिम का विरोध किया। आदित्य ठाकरे ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के लोग क्या हिन्दुत्व के ठेकेदार हैं? वो आधार कार्ड चेक करने वाले कौन होते हैं ? उद्धव ठाकरे ने विश्व हिन्दू परिषद और बीजेपी के लोगों को नकली हिन्दू करार दिया, कहा, ये सब गड़बड़ी की साजिश का हिस्सा है।
महाराष्ट्र के मंत्री नीतेश राणे ने करारा जवाब दिया। कहा कि वह तो चाहते हैं, गरबा पंडाल में आने वालों से हनुमान चालीसा का पाठ भी कराया जाए, जिन मुसलमानों को गरबा पंडाल में आने का बहुत शौक है, वो पहले घर वापसी करें, हिंदू बनें।
नवरात्र के समय गरबा उत्सव और उल्लास का प्रतीक है। नृत्य और संगीत के साथ देवी की आराधना का उत्सव है, हंसी-खुशी का अवसर है। इसमें सुरक्षा का ध्यान रखा जाए वो ठीक है पर मुसलमानों के no entry का शोर मचाने की क्या ज़रूरत? इसमें राजनीति घुसाने की क्या आवश्यकता है? उद्धव ठाकरे ने बयान दिया, नीतेश राणे ने जवाब दिया। इसी चक्कर में गरबा का मज़ा किरकिरा हो गया। अगर गरबा के उत्सव को सिर्फ़ उत्साह पर छोड़ दिया जाए तो अच्छा होगा।
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 08 सितंबर, 2026 का पूरा एपिसोड






































