नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने पश्चिम बंगाल से एक और आरोपी को अरेस्ट कर लिया है। यह गिरफ्तारी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश यानी JMB की एक शाखा की तरफ से रची गई आतंकी साजिश के सिलसिले में की गई। गिरफ्तारी के वक्त आरोपी के पास से मोबाइल फोन और मेमोरी कार्ड सहित कई डिजिटल डिवाइस सीज किए गए हैं।
पश्चिम बंगाल, असम और केरल में भी पकड़े गए 13 आरोपी
यह गिरफ्तारी उसी साजिश के सिलसिले में पश्चिम बंगाल, असम और केरल में 16 जगहों पर तलाशी के बाद 29 सितंबर 2026 को 13 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हुई है। इससे पहले, 25 जून 2026 को NIA ने असम के गुवाहाटी की NIA स्पेशल कोर्ट में 11 आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता यानी BNS, 2023 और UA (P) एक्ट, 1967 की सुसंगत धाराओं के तहत चार्जशीट दायर की थी।
जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश का हिस्सा है IMK
NIA की पड़ताल से पता चला है कि आरोपी आतंकी संगठन इमाम महमूद काफिला यानी IMK की रची गई एक साजिश में शामिल थे। IMK, JMB का ही एक हिस्सा है और इसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में प्रतिबंधित संगठन की चरमपंथी विचारधारा को फैलाना और उसके आतंकवादी नेटवर्क को फैलाना था।
क्या है इमाम महमूद काफिला का मकसद?
इस साजिश में आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाना, चरमपंथी विचारधारा का प्रचार करना और लोगों को संगठन में शामिल करना शामिल था। पड़ताल में यह भी पता चला है कि JMB के सीनियर सदस्य इमाम महमूद हबीबुल्लाह ने भारत में प्रतिबंधित संगठन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के मकसद से IMK बनाया था।
कट्टरपंथ फैलाने में जुटे आतंकी संगठन से जुड़े लोग
आरोपियों ने गुप्त बैठकों, धार्मिक कट्टरपंथ सिखाने वाले कार्यक्रमों, चरमपंथी साहित्य के प्रचार-प्रसार और कट्टरपंथ फैलाने व भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा के लिए टेलीग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल के माध्यम से IMK और JMB की गतिविधियों को बढ़ाने की साजिश रची। उन्होंने IMK और JMB की लीडरशिप के लिए निष्ठा को बढ़ावा देने और भारत में संगठन के नेटवर्क को मजबूत करने का भी प्रयास किया। इस मामले में अभी आगे की जांच जारी है।
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