भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी बल्लेबाज पूनम राउत ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। 37 साल की पूनम ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने तत्काल प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया है। पूनम ने 2009 से 2021 के बीच भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और अपने करियर में कई यादगार पारियां खेलीं।
पूनम राउत ने अपने संदेश में कहा कि काफी सोच-विचार करने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का फैसला किया है। उनके मुताबिक, भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। क्रिकेट ने उन्हें सिर्फ खेलना ही नहीं सिखाया, बल्कि मुश्किल हालात में डटे रहना और जीवन में आगे बढ़ना भी सिखाया। उन्होंने कहा कि जब भी उन्होंने भारतीय जर्सी पहनी, उन्हें गर्व और आभार महसूस हुआ। देश के लिए खेलने का सपना पूरा होना उनके जीवन की सबसे खास उपलब्धियों में से एक रहा है।
पूनम ने मुंबई क्रिकेट संघ का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में संघ से मिले भरोसे, अवसर और मार्गदर्शन ने उनके क्रिकेट करियर की नींव तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान पूनम ने भारत के लिए 4 टेस्ट, 73 एकदिवसीय और 35 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। एकदिवसीय क्रिकेट में उनके नाम 2,299 रन दर्ज हैं, जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने 719 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उनके बल्ले से 264 रन निकले। उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 4 शतक शामिल रहे, जिनमें 3 एकदिवसीय और 1 टेस्ट शतक है। इसके अलावा उन्होंने एकदिवसीय मुकाबलों में 15 अर्धशतक और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 4 अर्धशतक लगाए। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला जून 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय मैच था।
पूनम के करियर का सबसे यादगार दौर 2017 में आया, जब भारतीय महिला टीम ने विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया था। उस टूर्नामेंट में उन्होंने 381 रन बनाए थे। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल में भी उन्होंने 86 रन की शानदार पारी खेली, हालांकि भारतीय टीम 9 रन से मुकाबला हार गई थी।
साल 2021 में भी पूनम उस समय चर्चा में आई थीं, जब वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत के ऐतिहासिक गुलाबी गेंद वाले टेस्ट मैच में खेली थीं। उन्होंने पहली पारी में 36 रन बनाए। इस मुकाबले में गेंद बल्ले का किनारा लेकर निकली थी, लेकिन अंपायर ने उन्हें आउट नहीं दिया। इसके बावजूद पूनम खुद मैदान से बाहर चली गई थीं। उनके इस फैसले की खेल भावना के लिए काफी तारीफ हुई थी।
गौरतलब है कि पूनम राउत ने भारतीय महिला क्रिकेट के उस दौर में योगदान दिया, जब टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रही थी। उनकी तकनीक, धैर्य और अहम मौकों पर रन बनाने की क्षमता को लंबे समय तक याद किया जाएगा। संन्यास के साथ उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत हो गया है, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनकी यादगार पारियां हमेशा चर्चा में बनी रहेंगी।





































