वामपंथी छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली के प्रोटेस्ट को बांग्लादेश में हुए तख्तापलट से कंपेयर किया। नेहा बोरा ने कहा, दिल्ली में जिस तरह GEN-Z सड़क पर उतरी, ये ठीक वैसा ही था जैसे बांग्लादेश में GEN-Z ने क्रांति की, दिल्ली प्रोटेस्ट की प्रेरणा उन्हें बांग्लादेश से मिली।
दिल्ली को ढाका बनाने का इरादा खतरनाक है। हिंसा से सरकार बदलने की साजिश नापाक है। भारत कोई banana republic नहीं है। भारत में सरकारें जनता अपने वोट से बदलती हैं और जो लोग इस सिस्टम में विश्वास नहीं करते, उनका इलाज भी पब्लिक करती है। जंगलों में रहने वाले नक्सलियों का सफाया करने में सरकार को 10 साल लग गए। शहरों में ‘नक्सली मानसिकता’ रखने वाले अभी भी गलतफहमी में जी रहे हैं, लेकिन दिल्ली न ढाका है, न नेपाल। दुर्भाग्य की बात ये है कि हिंसा और अराजकता से सरकार बदलने का इरादा रखने वालों को गोद में बिठाकर राहुल गांधी ने अपनी पार्टी कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
बांग्लादेश में शेख मुजीबुर्रहमान की सरकार इंदिरा गांधी ने बनवाई थी। कांग्रेस ने कभी भी वहां की कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टियों का समर्थन नहीं किया। कांग्रेस की विचारधारा कभी ख़ूनख़राबे से सरकार बदलने की नहीं रही, लेकिन अब राहुल गांधी जिन नेहा बोरा को अपने साथ लेकर चलते हैं, वह तो उन जिहादियों से प्रेरणा लेती हैं, जिन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं का क़त्लेआम किया था। क्या राहुल गांधी ऐसी जिहादी सोच का साथ देंगे? क्या वो लेनिनवादी माओवादी संगठनों के रास्ते पर चलेंगे?
प्रशांत भूषण ने आंदोलन की पोल कैसे खोली
वकील प्रशांत भूषण नेहा बोरा से भी दो कदम आगे निकल गए। उन्होंने कल खुलकर कहा कि इस आंदोलन का मकसद भारत में सत्ता परिवर्तन करना है, इसके लिए जो करना पड़ेगा वो करेंगे। प्रशांत भूषण नेहा बोरा और CJP नेता अभिजीत दिपके के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। प्रशांत भूषण ने तो सारे प्रोटेस्ट की पोल खोल दी। जो लोग ‘वोट चोरी’ के नाम पर सड़कों पर उतरे थे, उनकी असलियत बता दी। बिल्ली थैले से बाहर आ गई।
प्रशांत भूषण ने बता दिया कि साजिश सरकार बदलने की है, बिना चुनाव के सत्ता परिवर्तन करने की है। क्या राहुल गांधी इस इरादे का समर्थन करेंगे? दो दिन वह प्रशांत भूषण के साथ खड़े थे। क्या भारत का लोकतंत्र अब दंगा कराने वालों के हवाले कर दिया जाएगा? ये सवाल कांग्रेस से बार-बार पूछा जाएगा।
तिरंगा कॉल: CJP वामपंथियों के आसरे
Cockroach Janta Party ने आज कनॉट प्लेस में तिरंग फहराने की कॉल दी है। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए हैं। जबतक CJP छात्रों के नाम पर लड़ाई लड़ रही थी, उसका थोड़ा बहुत प्रभाव था। कम से कम इंटरनेट पर तो उनके लिए समर्थन दिखाई देता था। जमीनी स्तर पर उनका अपना संगठन नहीं है। प्रोटेस्ट में लोग जुटाने के लिए CJP के लोग SFI, AISF और AISA जैसे कम्युनिस्ट संगठनों पर निर्भर करते हैं।
अब ये वामपंथी पिछले 10 दिनों से अपनी ताकत कांग्रेस के साथ लगाए हुए हैं। इसीलिए अब CJP की तिरंगा लहराओ प्रोटेस्ट को ज्यादा समर्थन मिलना मुश्किल है। दिल्ली पुलिस का इरादा भी साफ है। इस प्रोटेस्ट की परमिशन नहीं दी जाएगी, जो आएगा उसे रोका जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगे के नाम पर लोगों को इकट्ठा नहीं होने दिया जाएगा।
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