
भारत में सड़क निर्माण अब सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी दिखेगा। सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक अनोखी पहल करते हुए नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और सभी हाईवे डेवलपर्स को निर्देश दिया है कि वे अपने यूट्यूब चैनल बनाकर हर प्रोजेक्ट के वीडियो नियमित रूप से अपलोड करें। यह फैसला पारदर्शिता बढ़ाने और जनता से सीधे फीडबैक लेने के उद्देश्य से लिया गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क परिवहन सचिव वी. उमाशंकर ने मंगलवार को यह निर्देश जारी किया। उन्होंने कहा कि अब तक मंत्रालय को कई बार सड़क परियोजनाओं की जानकारी या समस्याओं के बारे में यूट्यूबर्स के वीडियो से जानकारी मिलती रही है, लेकिन अब यही काम NHAI खुद करेगा। उन्होंने साफ कहा कि हम चाहते हैं कि वीडियो अपलोडिंग को प्रोजेक्ट कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा बनाया जाए, ताकि जनता भी जान सके कि सड़कें कैसे बन रही हैं और कहां दिक्कतें हैं।
ड्रोन से शूट किए गए वीडियो
अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल डेवलपर्स को निर्माण के दौरान ड्रोन से शूट किए गए वीडियो सबमिट करने होते हैं। इसलिए इन वीडियोज को यूट्यूब पर पब्लिक करना कोई कठिन काम नहीं होगा। मंत्रालय का मानना है कि इस कदम से आम नागरिकों को हाईवे प्रोजेक्ट्स की रियल-टाइम प्रगति देखने का मौका मिलेगा और वे अपने सुझाव या शिकायतें सीधे शेयर कर सकेंगे।
QR कोड वाले होर्डिंग्स
इसी कार्यक्रम में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि अब हाईवे पर QR कोड वाले होर्डिंग्स लगाए जाएंगे, जिनको स्कैन कर लोग यह देख सकेंगे कि किस कंपनी ने सड़क बनाई है, कौन अधिकारी जिम्मेदार है और उनसे कैसे संपर्क किया जा सकता है। गडकरी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि अगर किसी सड़क की हालत खराब है और लोग सोशल मीडिया पर शिकायत कर रहे हैं, तो उसे नजरअंदाज न करें। तुरंत कार्रवाई करें।
सड़क निर्माण में लापरवाही नहीं
गडकरी ने यह भी कहा कि सड़क निर्माण में पूरी ईमानदारी, जिम्मेदारी और पॉजिटिव रवैया जरूरी है। उनका संदेश साफ है कि सड़कें सिर्फ अच्छी बननी ही नहीं चाहिए, बल्कि लंबे समय तक अच्छी बनी रहनी चाहिए। मंत्रालय की यह पहल न सिर्फ डिजिटल पारदर्शिता का नया मॉडल है, बल्कि जनता की भागीदारी को भी नए लेवल पर ले जाने वाली साबित हो सकती है।







































