
रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चिंता होती है पैसों की स्थिर और आजीवन आमदनी कैसे बनी रहे। अगर आपके पास 1 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट कॉर्पस है और आप चाहते हैं कि ये पैसा आपकी पूरी जिंदगी साथ निभाए, तो समझिए यह रकम कैसे हर महीने 1 लाख रुपये की इनकम दे सकती है, वो भी बिना जल्दी खत्म हुए। सुनने में आसान लगता है, लेकिन इसके पीछे गहरी समझ और सटीक प्लानिंग की जरूरत है।
रिटायरमेंट की सबसे बड़ी दुविधा: पैसा कितने साल चलेगा?
रिटायरमेंट के बाद यह तय करना सबसे जरूरी है कि आपका रिटायरमेंट फेज कितने साल का होगा 20, 30 या उससे ज्यादा। हेल्थकेयर में सुधार से लोग अब लंबा जी रहे हैं, इसलिए एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कम से कम 25 से 35 साल तक के रिटायरमेंट की प्लानिंग होनी चाहिए। मायमनीमंत्रा.कॉम के फाउंडर राज खोसला कहते हैं कि एक सामान्य नियम यह है कि आपको अपने रिटायरमेंट की प्लानिंग 85 माइनस रिटायरमेंट एज तक बनानी चाहिए। यानी अगर आप 60 पर रिटायर हो रहे हैं तो कम से कम 25 साल तक की तैयारी रखें।
4% रूल
रिटायरमेंट प्लानिंग की दुनिया में एक मशहूर नियम है 4% रूल। इसका मतलब है कि अगर आप अपने कुल कॉर्पस का 4% हर साल निकालते हैं और आपका निवेश 6% या उससे ज्यादा रिटर्न देता है, तो आपका पैसा आपकी पूरी रिटायरमेंट लाइफभर चलेगा। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास 1 करोड़ रुपये है और आप हर साल 4 लाख रुपये (यानि 33,333 महीना रुपये) निकालते हैं, तो 6% रिटर्न पर आपका पैसा 33 साल तक चलेगा। अगर रिटर्न बढ़कर 8% हो जाए, तो वही पैसा आपको लाइफटाइम इनकम दे सकता है और आपका कॉर्पस बढ़कर 1.99 करोड़ रुपये तक भी जा सकता है।
रिटर्न जितना ज्यादा, रिटायरमेंट उतना लंबा
अगर आपका पैसा 10% रिटर्न दे रहा है और महंगाई 4% है, तो 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस 4 लाख रुपये सालाना निकालने पर भी आजीवन टिक सकता है। लेकिन जैसे ही आप निकासी बढ़ाकर 1 लाख रुपये महीना करते हैं, कॉर्पस मुश्किल से 10-11 साल तक चलेगा। इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि पैसा निकालने की दर (withdrawal rate) सोच-समझकर तय करें। बहुत ज्यादा निकालने से कॉर्पस जल्दी खत्म होगा और बहुत कम निकालने से जीवन स्तर पर असर पड़ेगा।
कैसे बनाएं सही निवेश मिश्रण?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट विवेक बांका कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी आपको निवेश से पूरी तरह बाहर नहीं होना चाहिए। इक्विटी और फिक्स्ड इनकम का सही बैलेंस जरूरी है। 60-70% इक्विटी और 30-40% फिक्स्ड एसेट्स में निवेश करने से महंगाई पर काबू पाया जा सकता है। वे सुझाव देते हैं कि रिटायर होने पर 5 साल के खर्च को फिक्स्ड इनकम स्कीम्स में रखें और बाकी पैसा इक्विटी में लगाएं ताकि लंबी अवधि में बेहतर ग्रोथ मिले।
इन गलतियों से बचें
-
रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में ज्यादा पैसा निकालना
-
मार्केट गिरावट के दौरान इक्विटी से एग्जिट करना
-
बहुत ज्यादा कंजरवेटिव बन जाना
-
महंगाई को नजरअंदाज करना
Disclaimer: ये कोई निवेश सलाह नहीं है बल्कि सिर्फ एक जानकारी है। रुपये-पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।






































