चेन्नई: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी इंडिया गठबंधन के सांसदों के विरोध-प्रदर्शन के बीच, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन शनिवार को एक अहम बैठक करेंगे। यह बैठक चेन्नई स्थित डीएमके मुख्यालय ‘अन्ना अरिवलयम’ में होगी। सांसदों के साथ DMK मुख्यालय में होने वाली बैठक में मुख्य रूप से SIR के प्रति पार्टी के विरोध और चुनाव आयोग से ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने की मांग पर चर्चा होने की उम्मीद है।
संवैधानिक मूल्यों को नष्ट कर रही सरकार-कनिमोझी
DMK संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र की BJP सरकार संवैधानिक मूल्यों को नष्ट कर रही है। कनिमोझी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब INDIA गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
बता दें कि DMK शुरू से ही SIR का पूरी तरह से विरोध करती रही है। पार्टी का मानना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उसकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। ऐसे में शनिवार को होने वाली बैठक में पार्टी के रुख और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हो सकती है। अब ये देखना होगा कि आज पार्टी का नेतृत्व आगे की रणनीति पर क्या फैसला लेता है।
स्टालिन ने क्या एक्स पर क्या पोस्ट किया?
इससे पहले एम के स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार को कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके और आइसा प्रमुख नेहा बोरा को तुरंत रिहा करना चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाना बंद करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस बारे में जानकारी मांगी कि दीपके और बोरा कहां हैं। DMK अध्यक्ष ने कहा, ”उनके ठिकाने की जानकारी दिए बिना उन्हें हिरासत में रखना स्पष्ट रूप से गैरकानूनी और बेहद अमानवीय है। केंद्र सरकार को उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाना बंद करना चाहिए। आंदोलन को कुचलने की हर कोशिश उसे और मजबूत ही करेगी।”
ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा-स्टालिन
”मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा” की मांग दोहराते हुए स्टालिन ने दावा किया कि बीजेपी नीत केंद्र सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) नेता अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) प्रमुख नेहा बोरा को शुक्रवार को ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जाते समय दिल्ली पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया था। दीपके कनॉट प्लेस जा रहे थे, जबकि बोरा को मंडी हाउस जाना था।
डीएमके ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) का जो आदेश दिया है, वह दरअसल मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद विपक्षी दलों को शांत करने की एक कोशिश है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस आगामी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी होती है, तो वह इसका विरोध करेगा।
क्या है एसएसआर ?
निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की घोषणा की है, जिसके लिए एक जनवरी 2027 को पात्रता तिथि तय किया गया है। यह प्रक्रिया 12 नवंबर को एक मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ शुरू होगी। इसके बाद दावे (क्लेम) पेश करने का मौका मिलेगा जो 11 दिसंबर को समाप्त होगा और अंत में चार जनवरी 2027 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। वरिष्ठ नेता और द्रमुक प्रवक्ता टी.के.एस. इलांगोवन ने कहा, ”वह (आयोग) विपक्षी दलों की आवाज़ दबाना चाहता है। एसआईआर के दौरान कई नाम हटा दिए गए थे। इसलिए वह एक समझौते की स्थिति पर आना चाहता है। इसी वजह से वह एसएसआर को बढ़ावा दे रहा है।”
उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा,”कम से कम अब लोग तो चुप रहेंगे। विपक्षी दल भी चुप रहेंगे। हम देखते हैं कि एसएसआर में क्या होता है। अगर यह एसएसआर भी गलत हुआ, तो हम इसके खिलाफ लड़ेंगे।”
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