भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद खुद को सिर्फ मजबूत ही नहीं किया, बल्कि पूरी तरह से रीकैलिब्रेट और री-आर्म किया है। इस ऑपरेशन के बाद सेना ने अपने ढांचे और क्षमताओं में बड़ा बदलाव किया है। करीब 50 नई मिशन-रेडी यूनिट्स तैयार की गईं, जो किसी भी परिस्थिति में तुरंत एक्शन लेने में सक्षम हैं। साथ ही, 4 नई Agile Formations बनाई गईं, जो तेजी से मूवमेंट और सटीक ऑपरेशन के लिए डिजाइन की गई हैं।
सेना ने अपने हथियारों और तकनीक को भी एक नए स्तर पर पहुंचाया-:
- 5 लाख से ज्यादा आधुनिक हथियार शामिल किए गए
- 2 लाख से ज्यादा नई जनरेशन के इक्विपमेंट जोड़े गए
- 8 नए एंटी-टेरर ऑपरेशन फ्रेमवर्क तैयार किए गए
फॉर्मेशन मुख्यालयों का गठन
बता दें कि ये सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि बदलती युद्ध रणनीति का संकेत हैं। ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष बाद भारतीय सेना ने केवल एक सैन्य कार्रवाई की स्मृति तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि उस अनुभव को व्यापक बदलाव में बदलते हुए अपनी संरचना और क्षमताओं में महत्वपूर्ण सुधार किया है। पिछले एक साल में सेना ने खुद को बदलते युद्ध के स्वरूप के अनुरूप ढालने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। संगठनात्मक स्तर पर सेना ने नई इकाइयों और फॉर्मेशन मुख्यालयों का गठन किया है, जिससे उसकी संरचना अधिक लचीली और मिशन-उन्मुख बनी है। यह बदलाव इस समझ पर आधारित है कि आने वाले समय का युद्ध केवल पारंपरिक नहीं होगा, बल्कि इसमें ड्रोन, सटीक हमले, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रियल-टाइम जानकारी की अहम भूमिका होगी।
ड्रोन और रॉकेट शामिल हुए
सबसे बड़ा बदलाव सेना की क्षमताओं में दिख रहा है। पिछले एक साल में सेना ने अपनी सटीक मारक क्षमता को काफी मजबूत किया है। लंबी दूरी तक लक्ष्य पर नजर रखने और सही समय पर हमला करने वाले लॉन्ग-एंड्योरेंस Loitre म्यूनिशन (मंडराने वाला ड्रोन हथियार), कामीकाज़े ड्रोन और लेजर-गाइडेड रॉकेट्स को शामिल किया गया है। इससे अब सेना दूर से ही दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकती है और अपने सैनिकों के जोखिम को कम कर सकती है। इसके साथ ही निगरानी और स्थिति की जानकारी (सिचुएशनल अवेयरनेस) में भी बड़ा सुधार हुआ है। बड़ी संख्या में टेदरड ड्रोन (तार से जुड़ा निगरानी ड्रोन) शामिल किए गए हैं, जो लगातार आसमान में रहकर इलाके की निगरानी करते हैं। इससे कमांडरों को हर समय ताज़ा जानकारी मिलती है और फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं।
एयर डिफेंस को मजबूत किया गया
आधुनिक युद्ध में ड्रोन और कम ऊंचाई से आने वाले खतरों को देखते हुए सेना ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को भी मजबूत किया है। नए दौर के वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) और काउंटर-ड्रोन तकनीक को शामिल किया गया है, जिससे सेना अब ऐसे खतरों का बेहतर तरीके से सामना कर सकती है। फायरपावर के मामले में भी सेना ने अपनी ताकत बढ़ाई है। अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर के शामिल होने से जमीनी सैनिकों को हवाई समर्थन और सटीक हमले की क्षमता मिली है। इसके अलावा स्वदेशी तोप प्रणालियों को शामिल कर लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक अहम कदम है।
सैनिकों की सुरक्षा और क्षमता में बढ़ोतरी
वहीं, सेना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से- सैनिक पर भी खास ध्यान दिया गया है। आधुनिक असॉल्ट राइफल्स (जिसमें AK-203 भी शामिल हैं), बेहतर बुलेट प्रूफ जैकेट और बैलिस्टिक हेलमेट दिए जाने से सैनिकों की सुरक्षा और मारक क्षमता दोनों में बढ़ोतरी हुई है। इस पूरे बदलाव में एक खास बात यह रही है कि कई अहम उपकरणों की खरीद इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के जरिए तेज़ी से की गई, ताकि ऑपरेशन से मिले सबक को बिना देरी के लागू किया जा सके। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव केवल उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेना के सोचने और लड़ने के तरीके में भी बदलाव का संकेत है। अब जोर एक ऐसी सेना बनाने पर है जो तेज, सटीक, तकनीक से लैस और हर परिस्थिति के लिए तैयार हो।
ऑपरेशन सिंदूर ने जहां उस समय एक सशक्त जवाब दिया था, वहीं उसका असर अब सेना के इस बदलते स्वरूप में साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में भी सेना इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अपनी क्षमताओं को और मजबूत करती रहेगी।







































