अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सोना खरीदना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों के लिए समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लेकिन आज के दौर में सोना खरीदने का मतलब सिर्फ गहने बनवाना नहीं रह गया है। बदलते समय के साथ निवेश के तरीके भी बदल गए हैं। अब आप सोने के गहने खरीदने के बजाय डिजिटल सोना या गोल्ड ETF भी ले सकते हैं। लेकिन लोगों में मन में यह सवाल उठता है कि किस गोल्ड में निवेश कैसे किया जाए? तो चलिए जानते हैं।
सोने की ज्वैलरी
गहनों और सिक्कों के रूप में सोना खरीदना सबसे आम तरीका है। यह इमोशनल रूप से जुड़ा निवेश है, लेकिन इसमें खर्च ज्यादा होता है। मेकिंग चार्ज 5% से 25% तक लग सकता है और 3% जीएसटी भी देना पड़ता है। इसके अलावा शुद्धता और स्टोरेज की चिंता भी रहती है। सोने की ज्वैलरी हमेशा हॉलमार्क वाला ही खरीदें, गहनों के बजाय सिक्कों को प्रायोरिटी दें और बिल जरूर लें।
डिजिटल गोल्ड
डिजिटल गोल्ड में आप मोबाइल ऐप के जरिए छोटी रकम से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। यह सुविधाजनक है, लेकिन पूरी तरह रेगुलेटेड नहीं है। प्लेटफॉर्म पर निर्भरता और टैक्स से जुड़ी बातें रिस्क बढ़ा सकती हैं। अगर आपको डिजिटल गोल्ड लेना है तो भरोसेमंद प्लेटफॉर्म चुनें और जरूरत पड़ने पर इसे फिजिकल गोल्ड या ETF में बदलने का ऑप्शन देखें।
गोल्ड ETF
गोल्ड ETF को सबसे व्यवस्थित निवेश माना जाता है। यह सेबी के नियमों के तहत आता है और शेयर बाजार में खरीदा-बेचा जा सकता है। इसमें शुद्धता या स्टोरेज की चिंता नहीं होती। इसके लिए आपको डीमैट अकाउंट जरूरी होता है और थोड़ा ब्रोकरेज चार्ज भी देना पड़ता है। कम खर्च वाले ETF चुनें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें।
कौन सा ऑप्शन है बेहतर?
अगर आप सिर्फ परंपरा के लिए सोना खरीदना चाहते हैं तो ज्वैलरी ठीक है। लेकिन निवेश के नजरिए से देखें तो गोल्ड ETF ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित विकल्प है। वहीं, डिजिटल गोल्ड उन लोगों के लिए सही है जो छोटी रकम से शुरुआत करना चाहते हैं।







































