देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लंबे समय से स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन इसके पीछे तेल कंपनियों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। अब इस दबाव को कम करने के लिए सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने एक बड़ा कदम उठाया है। पहली बार फ्यूल प्राइस डिरेगुलेशन के बाद OMCs ने रिफाइनर्स को कम कीमत पर भुगतान करने का फैसला किया है।
सूत्रों के मुताबिक, OMCs ने पेट्रोल, डीजल, ATF और केरोसिन के लिए रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस (RTP) में भारी कटौती की है। कुछ मामलों में यह कटौती ₹60 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि अब रिफाइनर्स को उनके उत्पाद के लिए कम कीमत मिलेगी। आपको बता दें कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं। इससे OMCs को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹24 और डीजल पर ₹100 प्रति लीटर तक का घाटा हो रहा है।
नुकसान का बोझ बांटने की कोशिश
इस स्थिति से निपटने के लिए OMCs ने रिफाइनर्स को दिए जाने वाले दाम कम कर दिए हैं, ताकि नुकसान का बोझ पूरे सिस्टम में बांटा जा सके। हालांकि, इससे खासतौर पर स्वतंत्र रिफाइनर्स पर ज्यादा असर पड़ेगा।
किन कंपनियों पर ज्यादा असर?
MRPL, CPCL और HMEL जैसी कंपनियां, जो अपने उत्पाद का ज्यादातर हिस्सा OMCs को बेचती हैं, इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। वहीं, IOC, BPCL और HPCL जैसी बड़ी कंपनियां अपने रिफाइनिंग और मार्केटिंग बिजनेस के जरिए कुछ हद तक नुकसान की भरपाई कर सकती हैं।
बाजार पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम फिलहाल OMCs को राहत देगा, लेकिन इससे रिफाइनर्स के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, बाजार आधारित मूल्य निर्धारण प्रणाली पर भी असर पड़ सकता है।






































