नई दिल्ली: भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार ‘हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: विरासत से नवाचार तक’ का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। 17 और 18 सितंबर को आयोजित इस सेमिनार के उद्घाटन सत्र का विषय ‘राष्ट्र-निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की भूमिका’ रहा। कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र में इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के सफर, बदलते दौर, पत्रकारिता की जिम्मेदारी, सोशल मीडिया, AI और अपने पत्रकारिता जीवन से जुड़े कई अनुभव साझा किए।
‘हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में PM मोदी का नाम बार-बार आएगा’
रजत शर्मा ने इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जब हिंदी पत्रकारिता के 200 साल का इतिहास लिखा जाएगा तो एक व्यक्ति का नाम बार-बार लिया जाएगा और वह नरेंद्र मोदी हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी है। रजत शर्मा ने कहा,
‘आज हिंदी पत्रकारिता को जो मान-सम्मान मिला है, वह पहले नहीं था। पहले अंग्रेजी में बोलने और लिखने वाले पत्रकारों को ज्यादा तवज्जो मिलती थी।’
रजत शर्मा ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता से जुड़े अपने एक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने उन्हें ‘आप की अदालत’ में बुलाया था, तो उनकी कई शर्तें थीं। उनमें से एक शर्त यह थी कि वह कार्यक्रम में एक भी शब्द हिंदी में नहीं बोलेंगी, क्योंकि हिंदी वहां की राजनीति के अनुकूल नहीं मानी जाती थी। रजत शर्मा ने कहा कि इसके बावजूद जयललिता बहुत अच्छी हिंदी बोलती थीं। रजत शर्मा ने दक्षिण भारतीय सुपरस्टार यश के साथ हाल में हुए अपने इंटरव्यू का भी जिक्र किया। रजत शर्मा ने बताया कि यश ने कहा था कि हिंदी सीखने के लिए उन्हें छह महीने का समय चाहिए। उन्होंने इसे हिंदी को लेकर आए बदलाव से जोड़ा। रजत शर्मा ने कहा कि आज सरकार में जो लोग हैं, उनकी प्राथमिकता हिंदी भाषा है और इसी वजह से हिंदी पत्रकारिता को भी सम्मान मिला है।
वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली का किस्सा भी सुनाया
रजत शर्मा ने वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली से जुड़ा एक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनकी मार्क टली से मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि एक बार उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी से पूछा था, ‘अटल जी, अगर आप चुनाव नहीं जीत पाए तो क्या होगा?’ इस पर वाजपेयी जी ने जवाब दिया था, ‘Then I will lose यानी फिर मैं हार जाऊंगा।’
रजत शर्मा ने बताया कि मार्क टली बहुत अच्छी हिंदी बोलते थे। जब उन्होंने उन्हें ‘आप की अदालत’ में बुलाया तो टली ने बताया था कि वह जब किसी से हिंदी में सवाल पूछते हैं तो सामने वाला अंग्रेजी में जवाब देता है। उन्होंने कहा था कि हिंदी बोलने वालों को हीन नजरों से देखा जाता है।
‘रील वालों को देखकर न्यूज चैनलों की धारणा न बनाएं’
न्यूज चैनलों की पत्रकारिता को लेकर पूछे गए सवाल पर रजत शर्मा ने कहा कि इंडिया टीवी को शोर-शराबे से अलग रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमारा तो कहना ही यही है, शोर कम, खबरें ज्यादा।’ रजत शर्मा ने कहा कि न तो वह खुद शोर मचाते हैं और न ही उनके साथी।
न्यूज चैनलों को लेकर सोशल मीडिया पर बनने वाली धारणा पर रजत शर्मा ने कहा कि लोग अक्सर रील बनाने वालों को देखकर न्यूज चैनलों के बारे में राय बना लेते हैं। उन्होंने कहा,
‘आप जो न्यूज चैनल के लिए धारणा बना रहे हैं, वह रील वालों को देखकर बना रहे हैं। ये वो लोग हैं जो या तो सफल नहीं हो पाए या निकाल दिए गए। इसलिए आप उन्हें देखकर धारणा न बनाएं।’
छात्र राजनीति के दिनों और अटल बिहारी वाजपेयी का किया जिक्र
रजत शर्मा ने अपने छात्र राजनीति के दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय का दौर अलग था और देश में आंदोलन चल रहे थे। छात्र कम थे, इसलिए हॉस्टल से जुड़ी समस्याएं भी कम थीं। उन्होंने कहा कि आज का दौर अलग है और आज की राजनीति भी अलग है।
रजत शर्मा ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी पहले ऐसे विदेश मंत्री थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिंदी में भाषण दिया था। उन्होंने कहा कि ‘आप की अदालत’ में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी से कई सवाल पूछे थे। एक दिन उन्होंने अटल जी से कहा कि वह उनसे भाषण देने की कला सीखना चाहते हैं। रजत शर्मा के मुताबिक, अटल जी ने जवाब दिया था, ‘मुझसे भाषण देने की कला नहीं, चुप कहां रहना है, यह सीखिए।’ उन्होंने कहा कि अटल जी की यह सीख उनके जीवन में काफी काम आई।
‘दोस्त पत्रकार बन जाए तो बुरा नहीं लगना चाहिए’
रजत शर्मा ने अपने राजनीतिक संपर्कों और दोस्ती से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि उस समय किसी को नहीं पता था कि अरुण जेटली आगे चलकर वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि अगर कभी आपका दोस्त पत्रकार बन जाए तो आपको इस बात से बुरा नहीं लगना चाहिए कि वह आपके बारे में क्या कहता है।
उन्होंने नोटबंदी के समय अरुण जेटली से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया। रजत शर्मा ने बताया,
‘उस समय जेटली वित्त मंत्री थे और उन्होंने उनसे नोटबंदी के मुद्दे पर ‘आप की अदालत’ करने के लिए कहा था। कार्यक्रम के बाद अरुण जेटली अक्सर रुकते थे, लेकिन उस दिन वह नहीं रुके। उनके जाने के बाद मेरी पत्नी ने कहा कि मैंने उनके साथ सही नहीं किया। मैंने फिर अरुण जेटली से मुलाकात कर उनसे सॉरी कहा कहा जिसके बाद उन्होंने कहा कि तुम्हारा काम है सवाल पूछना, मेरा काम है जवाब देना। उस दिन मुझे लगा कि सही दोस्त मिला है।’
‘झूठ और सच में फर्क करना पत्रकार का काम’
रजत शर्मा ने कहा कि आज सोशल मीडिया के कारण जानकारी की बारिश हो रही है। ऐसे में सही और गलत सूचना के बीच फर्क करना जरूरी है। उन्होंने एक वीडियो का उदाहरण देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर यह चल रहा था कि चीन के राष्ट्रपति भारत आए और बीमार हो गए, जिसके बाद उन्हें चीन ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। रजत शर्मा ने कहा कि वास्तव में उनके माइक को ठीक किया जा रहा था। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्राध्यक्ष की तबीयत खराब होने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद एक अलग तरह का नैरेटिव बनाया गया कि भारत की हवा और पानी खराब है। रजत शर्मा ने कहा,
‘क्या झूठ है और क्या सच, इसमें फर्क करना एक पत्रकार का काम है।’
‘AI आपकी जगह नहीं ले सकता’
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल पर रजत शर्मा ने पत्रकारों को संवेदना और नवाचार के साथ काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा,
‘AI कविता नहीं लिख सकता। AI ने गरीबी नहीं देखी है। AI आपकी जगह नहीं ले सकता। आप जिस संवेदना से देश को देखते हैं, AI उस तरह नहीं देख सकता।’
उन्होंने कहा कि पत्रकारों को सिर्फ रूटीन तरीके से काम नहीं करना चाहिए, बल्कि नए और नवाचार वाले तरीके से काम करना चाहिए।
‘33 साल बाद भी आज भी बहुत नर्वस होता हूं’
अपने पत्रकारिता करियर का अनुभव साझा करते हुए रजत शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता में 33 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी वह कार्यक्रम से पहले नर्वस होते हैं। उन्होंने कहा,
‘आज भी बहुत नर्वस होता हूं। पसीने आते हैं। तीन-चार घंटे पहले से सोचता हूं कि काश शायद रिकॉर्डिंग न हो। लेकिन जब कान में आवाज पड़ती है कि 10 सेकंड बाकी हैं, तब सब भूल जाता हूं।’
पत्रकारिता की स्वतंत्रता और निर्भीकता पर रजत शर्मा ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के अंदर हिम्मत है और वह डरता नहीं है तो उसकी आवाज को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा,
‘अगर आपके अंदर हिम्मत है, आपके अंदर डर नहीं है तो आपकी आवाज खतरे में नहीं है। फ्री एंड फेयर हैं तो आपको कोई नहीं रोक सकता।’
इमरजेंसी के दौर का भी किया जिक्र
रजत शर्मा ने 1975 में लगे आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय देश के अखबारों और रेडियो में सरकार की बातें ही कही जा रही थीं। उन्होंने बताया कि ऐसे माहौल में उन्होंने विश्वविद्यालय में अपना पहला अखबार ‘मशाल’ निकाला था। देश की एकता पर बात करते हुए रजत शर्मा ने कहा कि भारत को बड़ी मुश्किल से आजादी मिली है और इसे बांटने नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश को बांटने की बात करता है तो उसका विरोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत को कमजोर या विभाजित करना चाहते हैं, ऐसे नागरिकों का विरोध किया जाना चाहिए।
‘गोदी मीडिया’ कहे जाने पर क्या बोले?
‘गोदी मीडिया’ जैसे आरोपों पर रजत शर्मा ने कहा कि उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि दूसरे लोग उनके बारे में क्या कहते हैं। वह सिर्फ इस बात की चिंता करते हैं कि कहीं उनसे कोई गलती तो नहीं हो गई। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया में अक्सर नकारात्मक बातें ज्यादा चलती हैं। उन्होंने कहा कि कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। जब रजत शर्मा से पूछा गया कि अगर वह पत्रकार नहीं होते तो क्या करते, तो उन्होंने ‘आप की अदालत’ से अपने लंबे जुड़ाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है भगवान ने मुझे बनाया ही ‘आप की अदालत’ करने के लिए है, और मैं अपनी आखिरी सांस तक यही करना चाहूंगा।






































