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बॉलीवुड डायरेक्टर केसी बोकाडिया अभिनेता नाना पाटेकर को याद करते हुए भावुक हो गए। दैनिक भास्कर से बातचीत में केसी बोकाडिया ने कहा कि नाना पाटेकर के जाने का झटका उन्हें गहराई से लगा था और वे उन्हें अपने बेहद करीब मानते थे। बोकाडिया के अनुसार, नाना पाटेकर का अभिनय किसी आम आदमी के व्यवहार जैसा स्वाभाविक था, जिसे दर्शकों ने हमेशा बहुत पसंद किया। उन्होंने कहा कि पूरा देश आज भी नाना पाटेकर को याद करता है और उनके जाने से हुई कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता। इसके अलावा उन्होंने अपने टीवी शो ‘संस्कार’ की सफलता, फिल्म इंडस्ट्री में आए बदलावों पर भी बात की।
आम आदमी के अभिनय के प्रतीक थे नाना पाटेकर केसी बोकाडिया ने बातचीत में बताया कि फिल्म उद्योग में कई बड़े और चर्चित सितारे रहे हैं, लेकिन नाना पाटेकर की शैली सबसे अलग थी। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर पर्दे पर आम इंसान के हाव-भाव और बोलचाल को जिस सादगी से पेश करते थे, वह उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। उन्हें पटकथा और संवादों की गहरी समझ थी। बोकाडिया के मुताबिक, नाना पाटेकर के अभिनय में कोई बनावट या दिखावा नहीं था, बल्कि उसमें असल जिंदगी की वास्तविकता और ईमानदारी झलकती थी। निधन पर लगा था गहरा झटका नाना पाटेकर के साथ अपने निजी और भावनात्मक जुड़ाव पर बात करते हुए केसी बोकाडिया भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि जीवन में पहली बार किसी के जाने से उन्हें इतना बड़ा मानसिक झटका लगा था। बोकाडिया ने बताया कि वे जल्द ही उनके घर जाकर उनकी पत्नी से मुलाकात करेंगे और अपना दुख व्यक्त करेंगे। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने एक महान कलाकार को बहुत जल्दी बुला लिया, लेकिन उनका काम और उनकी यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। सिनेमाघरों से दूर हुआ पारिवारिक दर्शक वर्ग थिएटर्स से टीवी का रुख करने के सवाल पर केसी बोकाडिया ने कहा कि अब सिनेमाघरों का माहौल बदल गया है। अच्छी पारिवारिक फिल्मों के अभाव में परिवार अब थिएटर्स में फिल्में देखने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने अपने दौर का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब लोग टिकट खिड़की पर लाइन लगाकर फिल्में देखते थे। ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘तेरी मेहरबानियां’, ‘आज का अर्जुन’, ‘फूल बने अंगारे’ और ‘लाल बादशाह’ जैसी उनकी फिल्मों को देखने के लिए थिएटर्स में भारी भीड़ उमड़ती थी। जीवन में गलतियों को रोकने का काम करते हैं संस्कार इंटरव्यू के दौरान केसी बोकाडिया ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के जीवन में संस्कार नहीं हैं, तो उसकी जिंदगी में गलतियां होना तय है। संस्कार इंसान को गलत कदम उठाने और गलत फैसले लेने से रोकते हैं। उन्होंने बताया कि दूरदर्शन पर चल रहे उनके शो ‘संस्कार’ को दर्शकों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इस शो में दर्शन जरीवाला, महेश ठाकुर, अमन वर्मा, राकेश बेदी, सुप्रिया कारनिक, मुग्धा गोडसे और जरीना वहाब जैसे कई वरिष्ठ और मंजे हुए कलाकार काम कर रहे हैं। संदेश और मकसद के बिना नहीं बनाता कोई भी फिल्म केसी बोकाडिया ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने करियर में 70 फिल्में बनाई हैं और वे बिना किसी सामाजिक संदेश के काम नहीं करते। उन्होंने अपनी फिल्म ‘तीसरी बेगम’ का उदाहरण दिया, जिसे सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद हाईकोर्ट से राहत मिली और बाद में यूए (UA) सर्टिफिकेट के साथ रिलीज किया गया। इसके अलावा उन्होंने अनुपम खेर, अन्नू कपूर और महिमा चौधरी स्टारर अपनी फिल्म ‘सिग्नेचर’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे हर सीन को क्लाइमेक्स की तरह ट्रीट करते हैं और अपनी सोच से समझौता नहीं करते।






































