पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग को नई रफ्तार दे दी है। हालात ऐसे हैं कि कई लोकप्रिय इलेक्ट्रिक कारों की बुकिंग तेजी से बढ़ रही है और वाहन कंपनियां ग्राहकों की मांग पूरी करने में मुश्किल महसूस कर रही हैं। कई मॉडलों पर अब एक महीने से लेकर तीन महीने तक की वेटिंग चल रही है।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की नई इलेक्ट्रिक SUV e-Vitara की बुकिंग पिछले एक महीने में दोगुनी हो गई है। कंपनी के डीलरों के मुताबिक इस कार की डिलीवरी के लिए ग्राहकों को 6 से 8 हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं लग्जरी कार निर्माता मर्सिडीज बेंज की इलेक्ट्रिक CLA सेडान को भी जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। कंपनी के अनुसार मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि कुछ डीलरों ने फिलहाल नई बुकिंग लेना भी बंद कर दिया है। इस मॉडल पर 2 से 3 महीने तक की वेटिंग चल रही है।
BMW और टाटा मोटर्स को भी मिल रही मजबूत मांग
BMW इंडिया ने भी माना है कि इलेक्ट्रिक कारों की मांग उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ी है। कंपनी अब अपने मुख्यालय से ज्यादा गाड़ियों की मांग कर रही है। मई में BMW की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 33 फीसदी पहुंच गई। टाटा मोटर्स का कहना है कि उनकी EV बुकिंग वास्तविक डिलीवरी की तुलना में लगभग दोगुनी हो चुकी है। कंपनी के मुताबिक ग्राहकों की मांग काफी मजबूत है, लेकिन सप्लाई चेन की चुनौतियों के कारण डिलीवरी प्रभावित हो रही है।
महिंद्रा और MG की कारों पर भी लंबी वेटिंग
महिंद्रा की XEV 9e और BE 6 जैसी इलेक्ट्रिक SUVs पर भी 4 से 8 सप्ताह तक की वेटिंग चल रही है। वहीं JSW MG मोटर की Windsor और ZS EV, जो पहले आसानी से उपलब्ध थीं, अब करीब एक महीने की वेटिंग के साथ मिल रही हैं।
ईवी मार्केट में आया बड़ा बदलाव
ऑटो इंडस्ट्रीज के एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ग्राहकों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से आकर्षित कर रही हैं। पहले जहां कंपनियों को EV बेचने के लिए ग्राहकों को समझाना पड़ता था, वहीं अब ग्राहक खुद इलेक्ट्रिक कारों के बारे में जानकारी लेकर शोरूम पहुंच रहे हैं।
आगे और बढ़ सकती है मांग
उद्योग जगत का मानना है कि यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में वाहन कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सप्लाई सुधारने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं।






































