
बारिश
भुवनेश्वर: देश के पूर्वी हिस्से में एक बार फिर मौसम का रुख बदल कता है। इसके पीछे वजह है बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव के क्षेत्र का बनना। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 36 घंटों में इसके दबाव क्षेत्र में तब्दील होने की उम्मीद है जिससे ओडिशा में बारिश हो सकती है। मौसम विभागने यह जानकारी दी है।
हल्की से मध्यम बारिश
मौसम विभाग के अनुमानों के मुताबिक मंगलवार और बुधवार को ओडिशा के कई जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है, जिसका अर्थ होता है सतर्क रहें। आईएमडी ने एक बयान में कहा, ‘‘समुद्र के ऊपर सोमवार को बने ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से मंगलवार सुबह साढ़े पांच बजे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बन गया है।’’ विभाग ने कहा कि अगले 36 घंटों के दौरान इसके दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के ऊपर एक दबाव क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है। इसके प्रभाव से ओडिशा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
आईएमडी ने कहा, ‘‘बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक पुरी, खुर्दा, नयागढ़, गंजम, गजपति, बौध, कंधमाल, रायगढ़, कोरापुट और मलकानगिरी में एक या दो स्थानों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवा के साथ गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।’’
तमिलनाडु में भी भारी बारिश
तमिलनाडु और पुडुचेरी में भारी बारिश होने की संभावना है, मौसम विभाग ने तमिलनाडु और केरल के कोयंबटूर, नीलगिरी, इरोड, तिरुप्पुर, थेनी और तेनकासी जिलों के घाट क्षेत्रों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है। चेन्नई और उसके पड़ोसी जिलों के लिए, मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि कुछ इलाकों में गरज और बिजली के साथ हल्की-मध्यम बारिश के एक-दो दौर हो सकते हैं। मौसम विभाग ने रविवार को बुलेटिन में कहा कि ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण अंडमान सागर और उससे सटे दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी पर बना हुआ है और समुद्र तल से 1.5 किमी ऊपर तक फैला हुआ है।
बुलेटिन में कहा गया है, “इसके प्रभाव से 21 अक्टूबर, 2025 के आसपास बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और अगले 48 घंटों के दौरान बंगाल की खाड़ी के मध्य भागों में एक अवदाब के रूप में केंद्रित होने की संभावना है।” दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी और कोमोरिन क्षेत्र में 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवा चलने तथा 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुंचने की संभावना है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी जाती है। (इनपुट-भाषा)






































