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मशहूर प्लेबैक सिंगर एस. जानकी का शनिवार को मैसूर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 88 साल की थीं। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि शुक्रवार रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। एस. जानकी ने अपने करियर में 48 हजार से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए। इनमें ज्यादातर गाने कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में हैं। एस. जानकी को साल 1985 में अनिल कपूर की फिल्म मेरी जंग के गाने बोल बेबी बोल रॉक एंड रोल गाने से फेम मिला था। यह गाना जावेद जाफरी पर फिल्माया गया था। एस. जानकी को चार नेशनल फिल्म अवॉर्ड और कई राज्य-स्तरीय सम्मानों से नवाजा गया है। करीब 60 साल लंबे करियर में उन्होंने फिल्मों, म्यूजिक एल्बम, टीवी और रेडियो के लिए गाने गाए। उन्होंने हिंदी, ओड़िया, कन्नड़, उर्दू, पंजाबी और बंगाली समेत करीब 20 भारतीय भाषाओं में अपनी आवाज दी। जानकी ने 1957 में अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत की थी। उनका पहला हिंदी गाना साल 1958 में आई फिल्म ‘मिस 58’ में था, जिसका संगीत जी. रामनाथन ने तैयार किया था। साल 1985 उनके बॉलीवुड करियर का सबसे अहम दौर साबित हुआ। उन्होंने फिल्म ‘साहेब’ का गाना ‘यार बिना चैन कहां रे’ गाया। इसी फिल्म का ‘जवां है दिल, जवां हैं हम’ भी काफी फेमस हुआ। इसी साल उन्होंने ‘सूर संगम’ में ‘प्रभु मोरे अवगुण चित न धरो’ और ‘आयो प्रभात सब मिल गाओ’ गाने गाए। वहीं, फिल्म ‘मर्द’ का ‘सुन रुबिया तुमसे प्यार हो गया’ और ‘झूठी’ का ‘आया जब से तू दिल में’ भी उनके चर्चित हिंदी गानों में शामिल हैं। इसके बाद उन्होंने ‘धर्म अधिकारी’, ‘आखिरी रास्ता’, ‘नाचे मयूरी’, ‘सत्यमेव जयते’, ‘मैं तेरे लिए’, ‘अव्वल नंबर’ और ‘हमसे है मुकाबला’ जैसी फिल्मों में भी अपनी आवाज दी। पद्मभूषण ठुकरा दिया था
2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण देने की घोषणा की, लेकिन उन्होंने यह सम्मान स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि दक्षिण भारतीय कलाकारों को अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर देर से पहचान मिलती है और उन्हें यह सम्मान बहुत देर से दिया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि दक्षिण भारतीय कलाकारों को उनका उचित हक नहीं मिलता है। संगीत जगत की जानकी अम्मा, 60 साल बाद खुद लिया संन्यास एस. जानकी को संगीत की दुनिया में जानकी अम्मा के नाम से जाना जाता था। वे हमेशा कहती थीं कि सिंगिंग ईश्वर का दिया हुआ उपहार है। वे अपनी सफलता का श्रेय संगीतकारों और गीतकारों को भी देती थीं। उनकी और एसपी बालसुब्रह्मण्यम की जोड़ी भारतीय फिल्म संगीत की सबसे सफल जोड़ियों में मानी जाती है। दोनों ने साथ मिलकर हजारों डुएट गाए। करीब छह दशक तक एक्टिव रहने के बाद उन्होंने 2017 में स्वयं घोषणा की कि अब वे नई रिकॉर्डिंग नहीं करेंगी। उनका कहना था, ‘मैं बहुत गा चुकी हूं, अब आराम करना चाहती हूं।’ उन्होंने मैसूर में एक कार्यक्रम के साथ अपने गायन करियर को विराम दिया।






































