भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने के लिए भारत को अमेरिका से एक खास शर्त पूरी होने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि जैसे ही अमेरिका भारत को उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ रेट देगा, ट्रेड डील को फाइनल कर उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।
अमेरिका से बेहतर टैरिफ रेट का इंतजार
पीयूष गोयल ने गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय की ओर से आयोजित एक वर्कशॉप में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अंतिम शर्त अमेरिका की ओर से मिलने वाला प्रिफरेंशियल रेट है। भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान को उसके प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ सुविधा मिले। अमेरिका ने 24 जुलाई से भारत समेत कई देशों के उत्पादों पर एक्स्ट्रा 10 फीसदी टैरिफ लगाया है। इसी बदलते टैरिफ माहौल के कारण दोनों देशों के बीच बातचीत आगे भी जारी है।
सितंबर के अंत में अमेरिका जाएंगे गोयल
ट्रेड डील को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए पीयूष गोयल सितंबर के आखिर में अमेरिका जाएंगे। वह G20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के साथ अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। ऐसे में भारत-अमेरिका ट्रेड डील का मुद्दा इस बैठक में अहम रहने की उम्मीद है। भारत के लिए यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने अमेरिका को करीब 87 अरब डॉलर के सामान का निर्यात किया है।
प्रतिस्पर्धी देशों से बेहतर टैरिफ क्यों जरूरी?
अमेरिकी बाजार में भारत को बांग्लादेश, वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। अगर भारतीय उत्पादों पर इन देशों की तुलना में कम शुल्क लगता है, तो भारतीय कंपनियों को कीमत के मामले में फायदा मिलेगा। पीयूष गोयल ने कहा कि केवल टैरिफ की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। असली बात यह है कि भारतीय उत्पादों पर प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कितना शुल्क लगाया जा रहा है।
भारत का FTA नेटवर्क भी हो रहा मजबूत
गोयल ने बताया कि भारत ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। ब्रिटेन, मॉरीशस, ओमान, यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते लागू हो चुके हैं। न्यूजीलैंड के साथ समझौता जल्द प्रभावी होने की उम्मीद है, जबकि यूरोपीय संघ समेत कई अन्य देशों और समूहों के साथ बातचीत जारी है। इन समझौतों के जरिए भारत अपने निर्यातकों को दुनिया के बड़े बाजारों तक बेहतर पहुंच देने की कोशिश कर रहा है।
एक्सपोर्ट बढ़ाने पर सरकार का बड़ा लक्ष्य
भारत ने मौजूदा वर्ष के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में निर्यात करीब 317 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 280 अरब डॉलर से ज्यादा है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत के कुल निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। ऐसे में अमेरिका के साथ बेहतर ट्रेड डील और दूसरे देशों के साथ FTA भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
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