Coffee Par Kurukshetra: इंडिया टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम “कॉफी पर कुरुक्षेत्र” में भारतीय वायुसेना से जुड़े एक दस्तावेज़ को लेकर विस्तृत बहस देखने को मिली। कार्यक्रम में दावा किया गया कि ब्रिज सपोर्ट टेंडर से जुड़े इस दस्तावेज़ ने राफेल लड़ाकू विमानों की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों और पाकिस्तान के दावों पर बड़ा जवाब दिया है। इस चर्चा में शो की एंकर पीनाज त्यागी के साथ मेहमान के तौर पर डिफेंस एक्सपर्ट मेजर जनरल भाटिया, कर्नल शैलेंद्र सिंह और पूर्व फाइटर पायलट ग्रुप कैप्टन डीके पांडे मौजूद रहे।
ब्रिज सपोर्ट टेंडर क्या है?
कार्यक्रम में बताया गया कि यह दस्तावेज़ एक अस्थायी पांच महीने के ब्रिज अरेंजमेंट से जुड़ा है। यह तब लागू किया गया जब मौजूदा मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो रहा था और नए टेंडर की प्रक्रिया जारी थी। इसमें राफेल फ्लीट के रखरखाव और फ्लाइंग आवर्स से जुड़ी आवश्यकताओं का विवरण शामिल बताया गया।
36 का आंकड़ा क्यों चर्चा में आया?
चर्चा के दौरान कहा गया कि दस्तावेज़ में दर्ज “36” का आंकड़ा यह संकेत देता है कि भारतीय वायुसेना के सभी 36 राफेल विमान सुरक्षित और परिचालन स्थिति में हैं। इसी आधार पर यह दावा किया गया कि राफेल को लेकर उठे सवालों और अफवाहों पर यह दस्तावेज़ स्पष्टता देता है।
पाकिस्तान के दावों पर पलटवार
कार्यक्रम में कहा गया कि पाकिस्तान की ओर से पहले यह दावा किया गया था कि भारत के राफेल विमान किसी ऑपरेशन के दौरान गिराए गए हैं। लेकिन चर्चा में मौजूद विशेषज्ञों ने इसे “झूठा नैरेटिव” बताया और कहा कि ऐसे दावे सूचना के वैक्यूम का फायदा उठाकर फैलाए जाते हैं।
विपक्ष ने उठाए थे सवाल
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि विपक्षी नेताओं द्वारा राफेल की स्थिति और ऑपरेशनल जानकारी पर लगातार सवाल उठाए गए थे। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, आधिकारिक दस्तावेज़ और प्रक्रियाओं से यह स्पष्ट होता है कि विमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
सूचना युद्ध, नैरेटिव की लड़ाई
चर्चा में यह मुद्दा भी उठा कि आधुनिक समय में युद्ध केवल जमीन और आसमान तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना और नैरेटिव की भी लड़ाई होती है। वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया और राजनीतिक बहसें कई बार भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ
कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया गया कि भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले किए और कई रणनीतिक लक्ष्यों को नष्ट किया। साथ ही यह भी कहा गया कि ऐसे अभियानों में नागरिक क्षति से बचने का पूरा ध्यान रखा जाता है।
वायुसेना की कार्यप्रणाली पर चर्चा
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि किसी भी वायुसेना में तकनीकी कारणों, मौसम या ऑपरेशनल परिस्थितियों के कारण विमान दुर्घटनाएं हो सकती हैं। लेकिन इन्हें किसी विशेष ऑपरेशन में हुए बड़े नुकसान से जोड़ना सही नहीं होता।
डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिए गए वीडियो पर क्लिक करें।
(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)







































