राम मंदिर के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पहला बयान आया। संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा, कोई कितना भी बड़ा हो, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए, ऐसा पाप करने वालों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भविष्य में कोई इस तरह का पाप न कर सके, इसके लिए सरकार और ट्रस्ट को एक्शन लेना चाहिए। सरकार्यवाह ने कहा, “पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग एवं बलिदान के कारण संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए रामलला मंदिर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केन्द्र बना। मंदिर में रखे हुए दान पात्रों में जमा राशि की चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से समूचे समाज और राम भक्तों की भावना एवं श्रद्धा को आघात पहुँचा है तथा इस घटना से हम सभी आहत हैं।”
होसबाले ने कहा, “जाँच में जो भी दोषी पाए जाएँगे उन्हें कठोर दंड हो, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।” उन्होंने हिन्दू समाज से अपील की कि वह “इस कठिन क्षण में आवश्यक धैर्य और संयम का परिचय दें तथा इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का लाभ उठाकर हिन्दू विरोधी, राष्ट्र विरोधी शक्तियों के हिंदू धर्म एवं समाज को बदनाम करने के षड़यंत्रों को विफल करे।” RSS, विश्व हिंदू परिषद और बाबा बागेश्वर जैसे साधु संत सब इस बात पर सहमत हैं कि राम मंदिर के दान पात्र से चोरी करने वालों ने महापाप किया है, उनमें से किसी को भी बख्शा ना जाए। कौन छोटा है, कौन बड़ा, इसकी परवाह न की जाए।
दूसरी बात जिस पर संघ, परिषद और संत समाज एकमत है, वो ये कि कुछ लोग इस मामले का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों के मंसूबों के बारे में हिंदू समाज को सावधान किया जाए। मुझे लगता है कि राम मंदिर पर राजनीति कोई पहली बार तो नहीं हो रही। इस पर सियासत तो होगी। कुछ लोग इसका फायदा भी उठाएंगे, पर इस पर ध्यान देने की बजाय RSS, VHP और संत समाज को इस बात पर फोकस करना चाहिए कि राम मंदिर में दान के हिसाब-किताब के लिए एक foolproof व्यवस्था बनायी जाय, इसमें professionals की मदद ली जाए, व्यवस्था scientific और perfect हो ताकि भविष्य में किसी को ट्रस्ट पर या राम मंदिर पर कब्जा जमाने का मौका ना मिल सके।
एथेनॉल सही या गलत: सरकार सारी शंकाओं को दूर करे
क्या एथेनॉल युक्त पेट्रोल से गाड़ियों का इंजन खराब हो रहा है? क्या एथेनॉल से माइलेज में कमी आ रही है? पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि एथेनॉल से माइलेज में कमी की बात पूरी तरह ठीक नहीं हैं क्योंकि माइलेज में कमी के बहुत से कारण होते हैं। इंजन की पावर और acceleration में भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पुरी ने कहा कि सारी दुनिया fossil fuel से क्लीन फ्यूल की तरफ बढ़ रही है, ऐसे में पेट्रोल में एथेनॉल blending का फैसला अच्छा है। पुरी ने यहां तक कहा कि एथेनॉल युक्त पेट्रोल का इस्तेमाल अब रेसिंग कारों में भी हो रहा है, इससे उनका acceleration बढ़ता है।
पेट्रोलियम मंत्री हों या भारत पेट्रोलियम कंपनी के अफसर, सभी ने ये माना कि एथेनॉल से माइलेज में कमी आती है, लेकिन कितनी कमी आती है, इसको लेकर सबके दावे अलग अलग हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल की energy density करीब 33 परसेंट कम होती है। पावर जेनरेट करने के लिए एथेनॉल में ज़्यादा फ्यूल जलता है, इससे माइलेज कम हो जाता है। अगर आपकी गाड़ी 2024 से पहले की है तो फिर माइलेज कम मिलेगा 2024 के बाद की गाड़ियां E10 और E20 compliant हैं। इनके इंजन मैटेरियल और दूसरे पार्ट्स को इस तरह ट्यून किया गया है जिससे एथेनॉल से गाड़ी के इंजन को कोई नुकसान न हो।
ये सही है कि पेट्रोल पर निर्भरता कम करनी है। इसमें हमारी काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ये भी वैज्ञानिक तौर पर साबित किया गया है कि कि इथेनॉल इसका एक अच्छा विकल्प हो सकता है लेकिन असली बात तो तब पता चलती है जब विकल्प का इस्तेमाल होता है। अगर पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से माइलेज में कमी आएगी, गाड़ियां खराब होने लगेंगी, पुरानी गाड़ियां बैठ जाएंगी तो लोग इथेनॉल युक्त पेट्रोल पर भरोसा कैसे करेंगे? इसीलिए बड़ी-बड़ी बातें कहने की बजाय practical life में ये सबित करके दिखाना चाहए कि इथेनॉल से गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं होता। लोग सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन अगर fuel pump और engine के parts को नुकसान होगा तो फिर कोई इथेनॉल का इस्तेमाल क्यों करेगा?
ई-रिक्शा रोकने वाले apps पर बैन: एक सही कदम
सरकार ने शुक्रवार को कई ऐसे एप्स को तुंरत ब्लॉक करने के निर्देश दिए, जिनकी मदद से ई-रिक्शा की बैटरी को दूर से ही स्विच ऑफ किया जा रहा था। इस तरह की हजारों शिकायतें दिल्ली, मुंबई, भोपाल और उज्जैन जैसे कई शहरों से आई थी। सरकार ने जांच की और फिर एनड्रॉयड और IOS एप स्टोर से BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion जैसे एप्स को तुरंत हटाने के आदेश जारी कर दिए। इन सारे ऐप्स का इस्तेमाल बैटरी व्हीकल्स को रिमोट के जरिए बंद करने के लिए हो रहा था। खासतौर पर ई-रिक्शा चलाने वालों को निशाना बनाया जा रहा था।
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि Lithium बैटरी का कंट्रोल सिस्टम BMS यानि Battery Management System होता है। बैटरी की health, voltage, temperature की निगरानी करने के मकसद से कुछ App develop किए गए हैं। जब लोग गाड़ियां खरीदते हैं तो battery operated गाड़ियों के लिए कंपनियां इन Apps को promote करती हैं। लेकिन अगर battery को password से protect न किया जाए तो शरारत करने वाले इन Apps के जरिए battery को control कर लेते हैं।
अब सवाल है कि इस तरह की हरकतें क्यों की जाती हैं? पुलिस ने बताया कि कुछ मैकेनिक ई-रिक्शे वालों से पैसा ऐंठने के लिए गड़बड़ी करते हैं और कुछ ई-रिक्शे वाले भी सवारियां छीनने के लिए दूसरे E-rickshaw को block करते हैं। असल में जिन Apps का गलत इस्तेमाल हो रहा है, उन्हीं को block किया गया है। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 03 जुलाई, 2026 का पूरा एपिसोड








































