सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि ज्यादा कीमत वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन पर शुल्क लग सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क लगाने का फैसला नहीं किया है। आठवले ने इन दावों को पूरी तरह से “बेबुनियाद और झूठा” बताया। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए आठवले ने कांग्रेस नेता पर निशाना साधा और कहा कि सरकार के पास अभी कोई ट्रांजैक्शन शुल्क शुरू करने या बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं है।
सरकार के सामने ऐसा कोई मामला नहीं
आठवले ने ANI को बताया, ‘अब राहुल गांधी आरोप लगा रहे हैं कि अगर ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये से ज्यादा का होता है, तो सरकार उस पर शुल्क लगाने पर विचार कर रही है। राहुल गांधी का यह आरोप झूठा है। अभी सरकार के सामने ऐसा कोई मामला नहीं है जिसमें किसी शुल्क को शुरू करने या बढ़ाने की बात हो।’
व्यापारियों पर बोझ नहीं डालेगी सरकार
आठवले ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने हमेशा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार में आसानी) को प्राथमिकता दी है और वह व्यापारियों पर बोझ नहीं डालेगी। उन्होंने कहा, ‘आगे चलकर सरकार जो भी फैसला सही समझेगी, वह लेगी, लेकिन सरकार का रुख कभी भी व्यापारियों और कारोबारियों को परेशान करने का नहीं रहा है।’
इस आरोप को खारिज करते हुए कि भारत के नीतिगत फैसले विदेशी ताकतों से प्रभावित होते हैं, अठावले ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार बाहरी दबाव में काम नहीं करती है और दुनिया भर में स्वतंत्र और संतुलित द्विपक्षीय संबंध बनाए रखती है।
सरकार पर अमेरिका का कोई दबाव नहीं
आठवले ने कहा, ‘इसके अलावा, सरकार पर अमेरिका का कोई दबाव नहीं है। नरेंद्र मोदी सरकार चीन, रूस, ईरान और सभी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखती है। अमेरिका के साथ भी हमारे अच्छे व्यापारिक संबंध हैं। इसलिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हमारी भारतीय सरकार पर अमेरिका का कोई दबाव नहीं है।’
आरोपों में कोई सच्चाई या तथ्य नहीं- आठवले
यह दोहराते हुए कि डिजिटल ट्रांजैक्शन के बारे में ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है, मंत्री ने कहा, ‘अभी तक 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। इसलिए, राहुल गांधी झूठे आरोप लगा रहे हैं और इन आरोपों में कोई सच्चाई या तथ्य नहीं है।’
आठवले का यह बयान तब आया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने UPI पर चार्ज लगाने की प्रक्रिया शुरू करके अमेरिकी पेमेंट कंपनियों के दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं।
UPI को लेकर क्या बोले राहुल गांधी?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में गांधी ने कहा कि भले ही सरकार का दावा है कि ग्राहकों से सीधे कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा, लेकिन 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की इजाजत देने से आखिरकार रिटेल कीमतें बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। अब 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जा सकता है। भले ही ये ट्रांजैक्शन कुल वॉल्यूम का सिर्फ 5% हों, लेकिन UPI की कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी लगभग 65% है। सरकार कहती है कि ग्राहकों से कोई फीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदारों पर लगाई गई फीस आखिरकार कहां से आएगी? कीमतों में जुड़कर, सीधे ग्राहक की जेब से।’
अमेरिकी दबाव के आगे झुक रही मोदी सरकार- राहुल गांधी
कांग्रेस नेता ने कहा कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-MDR पॉलिसी का विरोध करती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने इसी दिशा में पॉलिसी बदलने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने कहा, ‘US ट्रेड डील की तरह ही, PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे झुक रहे हैं।’
ये भी पढ़ें:







































