भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली। मंगलवार को दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 238.41 अंक की गिरावट के साथ 77,470.11 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50.80 अंक टूटकर 24,187.70 के स्तर पर आ गया। हालांकि बाजार में खरीदारी और बिकवाली लगभग बराबर रही, लेकिन बड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव हावी रहा, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।
दिनभर की ट्रेडिंग में सिप्ला सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों में शामिल रही और करीब 2% फिसल गई। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और मैक्स हेल्थकेयर में भी 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। आईटी सेक्टर में टीसीएस और इन्फोसिस के शेयर कमजोर रहे। ऑटो सेक्टर भी दबाव में दिखा, जहां मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स के शेयर करीब 1% तक टूट गए। वहीं बजाज ऑटो के तिमाही नतीजों से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
क्यों टूटा शेयर बाजार?
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकता है।
विदेशी निवेशकों ने की बिकवाली
बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी असर पड़ा। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब ₹1,121 करोड़ के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगभग ₹1,312 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन यह गिरावट रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
एचडीएफसी बैंक की कमजोरी भी बनी बड़ी वजह
बाजार में सबसे ज्यादा वजन रखने वाले एचडीएफसी बैंक के शेयरों में भी करीब 2% की गिरावट आई। इससे पहले एचडीएफसी बैंक के जून तिमाही नतीजों में मार्जिन उम्मीद से कमजोर रहने के कारण शेयर में बड़ी बिकवाली हुई थी। बैंक के शेयर में कमजोरी का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर देखने को मिला। जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं होते और कच्चे तेल की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है। हालांकि मजबूत कंपनियों के तिमाही नतीजे आगे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।






































