पब्लिक सेक्टर की सबसे बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) अपने खुद के कच्चे तेल और लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) के ट्रांसपोर्टेशन के लिए कार्गो शिप खरीदने की प्लानिंग कर रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास कार्गो शिप की आवाजाही में भारी दिक्कतें और किराये की बढ़ती लागत के कारण भारत की सबसे बड़ी तेल रिफाइनर कंपनी को अपनी एनर्जी सप्लाई चेन पर मजबूत नियंत्रण बनाए रखने के लिए ये कदम उठाना पड़ रहा है।
पहले ही कुछ कार्गो शिप की खरीद को मंजूरी दे चुका है IOC का बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के डायरेक्टर (फाइनेंस) अनुज जैन ने दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों के बाद विश्लेषकों के साथ बातचीत में बताया कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने पहले ही कुछ कार्गो शिप की खरीद को मंजूरी दे दी है और इसके लिए कई महीने पहले टेंडर जारी किए गए थे। अनुज जैन ने कहा, ”देश को इस समय ऑयल सेक्टर की कंपनियां शिपिंग सेक्टर पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।”
भारत में जहाज बनाने की संभावना भी तलाश रही है कंपनी
अनुज जैन ने आगे कहा कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत में जहाज बनाने की संभावना भी तलाश रही है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास वाणिज्यिक आवाजाही बाधित होने से शिपिंग कैपेसिटी को सुरक्षित करने का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने ने कहा कि इंडियन ऑयल के पास इस समय निश्चित अवधि के लिए किराये पर लिए गए कच्चे तेल के तीन जहाज और एलपीजी के 9 जहाज हैं।
160-180 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गई हैं एलपीजी मालभाड़ा की दरें
जहाजों की इन व्यवस्थाओं ने मौजूदा संकट के दौरान लागत में महत्वपूर्ण बचत प्रदान की है। हाजिर बाजार में 8 से 10 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक के रेट की तुलना में कंपनी के निश्चित अवधि के लिए किराये पर लिए गए कच्चे तेल के जहाजों की लागत लगभग 2.00 से 2.50 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल आती है। उन्होंने कहा कि एलपीजी मालभाड़ा की दरें, जो सामान्य रूप से लगभग 40 अमेरिकी डॉलर प्रति टन होती हैं, हाजिर बाजार में बढ़कर 160-180 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गई हैं।
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