शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच म्यूचुअल फंड में SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) निवेश का सबसे सुरक्षित और लोकप्रिय जरिया बन चुका है। लेकिन अक्सर निवेशक इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि उनके रिटर्न पर निवेश की तारीख का क्या असर होगा। क्या 1 तारीख या 15 तारीख के बीच का चुनाव आपके बैंक बैलेंस में लाखों का अंतर पैदा कर सकता है?
हाल ही में एक लार्ज कैप म्यूचुअल फंड के 10 साल के आंकड़ों (मार्च 2015 से मार्च 2025 तक) का विश्लेषण किया गया। इस स्टडी में हर तारीख पर किए गए निवेश के रिटर्न की जांच की गई। नतीजे हैरान करने वाले थे। आंकड़ों के मुताबिक, अलग-अलग तारीखों पर मिलने वाला औसत रिटर्न 13.07% से 13.26% के बीच रहा। यानी अगर आपने ₹2000 की मंथली SIP की है, तो 10 साल में आपको मिलने वाली रकम में महज ₹6,000 का अंतर देखा गया। यह साबित करता है कि लंबी अवधि में तारीख का असर न के बराबर होता है।
रिटर्न में बदलाव क्यों?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, निवेशक अक्सर तारीख पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जबकि असल मुनाफा इन बातों पर निर्भर करता है:
- आप किस फंड हाउस और कैसी स्कीम (स्मॉल, मिड या लार्ज कैप) में निवेश कर रहे हैं।
- आप कितने सालों तक (10, 20 या 30 साल) बाजार में टिके रहते हैं।
- हर साल अपनी निवेश की राशि को थोड़ा-थोड़ा बढ़ाना।
- बाजार गिर रहा हो या बढ़ रहा हो, अपनी किस्त को न रोकना।
शॉर्ट टर्म बनाम लॉन्ग टर्म
अगर आप केवल 6 महीने या 1 साल के लिए निवेश कर रहे हैं, तो बाजार के मूड के हिसाब से तारीख का थोड़ा असर दिख सकता है। लेकिन 10-15 साल के लंबे सफर में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग अपना काम करती है। आप कभी ऊंचे भाव पर यूनिट्स खरीदते हैं तो कभी निचले भाव पर, जिससे लंबी अवधि में औसत भाव बैलेंस हो जाता है।
तो कौन सी तारीख है बेस्ट?
SIP की तारीख तय करने का सबसे अच्छा पैमाना बाजार की चाल नहीं, बल्कि आपका कैश फ्लो होना चाहिए। अगर आपकी सैलरी महीने की 1 से 5 तारीख के बीच आती है, तो इसी दौरान SIP सेट करना सबसे सेफ है। इससे आपके खाते में पर्याप्त बैलेंस रहता है और किस्त मिस होने या पेनल्टी लगने का डर खत्म हो जाता है।






































