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फिटनेस और एडवेंचर की दुनिया का चर्चित चेहरा रणविजय सिंह एसके मैराथन में शामिल होने रायपुर पहुंचे। लगभग 21 कैटेगरी में मरीन ड्राइव से मैराथन की शुरुआत होगी। जिसका फ्लैग अॉफ रोडिज फेम रणविजय करेंगे। इस बार लेट्स रन टूवर्डस अ हेल्थियर इंडिया एंड अ सेफर डिजिटल इंडिया थीम पर होने वाली इस मैराथन में 10 हजार धावकों के शामिल होने की संभावना है। इस मौके पर रणविजय ने सिटी भास्कर से एक्सक्लूसिव बात की और अपने अनुभव साझा किए। पढ़िए रणविजय ने यूथ, फिटनेस और लाइफस्टाइल को लेकर क्या कहा… आने वाले समय में आपके क्या प्लान्स हैं? – मेरे बच्चे अभी छोटे हैं, तो मैं उनके लिए समय निकलना चाहता हूं। करियर के एक फेज में बहुत दौड़-धूप की, पर अब बच्चों के बड़े होने तक सलेक्टिव वर्क करने का प्लान है। क्वॉन्टिटी से ज्यादा क्वॉलिटी ऑफ वर्क पर फोकस है। रील और रियल लाइफ के बीच यूथ खुद को कैसे बैलेंस करे? – यूथ जो भी करता है वो अपने परिवार, बड़ों और समाज को देख कर करता है। जो उदाहरण हम उन्हें देंगे, वे आगे चल कर वही करेंगे। यूथ को खुद की सेल्फ-वर्थ समझना जरूरी है। किसी और के लिए नहीं, अपने लिए जिएं। आप काफी ओवरवेट थे, फिर इसे कैसे ठीक किया? – एक स्कूल में फिटनेस सेशन के दौरान बच्चे ने कहा कि आप तो फिट हैं, इसलिए फिटनेस की बात कहना आसान है। मैंने इसे चैलेंज के रूप में लिया। 39 की उम्र में 83 किलो से 108 किलो तक वेट गेन किया। फिर वर्कआउट और सही न्यूट्रिशन रूटीन फॉलो करके 9 महीने में वापस खुद को फिट किया। मिलिट्री फैमिली बैकग्राउंड की वजह से आपको लाइफ में कितनी हेल्प मिली – मिलिट्री बैकग्राउंड से होना मेरे लिए एडेड एडवांटेज साबित हुआ है। इसकी वजह से डिसिप्लिन, पंक्चुएलिटी और हर सिचुएशन में एडजस्ट करना मेरी लाइफ का हिस्सा रहे हैं। देश के छोटे-बड़े मिलिट्री कैनटोनमेंट(छावनी) में पापा की पोस्टिंग हुईं, जिससे मेरी पढ़ाई 9 अलग-अलग स्कूल्स से पूरी हुई। इस वजह से पूरा भारत नजदीक से देखा है, हर जगह दोस्त बनाए और हर शहर से कुछ सीखने को मिला। आपके अनुसार लाइफ में स्पोर्ट्स और फिटनेस की क्या अहमियत है? – स्पोर्ट्स मेरी लाइफ का मंत्रा है। स्पोर्ट्स डिसिप्लिन और स्ट्रैटजी सिखाता है, मोटिवेटेड रखता है, चैलेंजेज लेने के योग्य बनाता है और पॉजिटिव फ्रेम ऑफ माइंड देता है। फिटनेस, लाइफस्टाइल का बाय-प्रोडक्ट है। एक्टिव लाइफस्टाइल और माइंडफुल ईटिंग से अपने माइंड और बॉडी का हर उम्र में ध्यान रखा जा सकता है।







































