कैबिनेट ने ‘इमिग्रेशन, वीजा, विदेशियों का पंजीकरण और ट्रैकिंग’ (IVFRT) योजना को अगले 5 सालों तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। बताते चलें कि ये योजना 31 मार्च, 2026 को खत्म होने वाली थी। लेकिन, कैबिनेट द्वारा मंजूरी मिलने के बाद अब ये योजना 31 मार्च, 2031 तक चलेगी। सरकार इस योजना को अगले 5 सालों तक जारी रखने के लिए 1800 करोड़ रुपये खर्च करेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी। IVFRT योजना उभरती हुई टेक्नोलॉजी को अपनाकर इमिग्रेशन और वीजा सिस्टम को आधुनिक बनाएगी, जिसमें यात्रियों की आसान और सुरक्षित आवाजाही के लिए मोबाइल-आधारित सेवाएं और सेल्फ-सर्विस कियोस्क शामिल हैं।
क्या है IVFRT योजना
बताते चलें कि IVFRT योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस पहल है, जिसकी गृह मंत्रालय निगरानी करता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत आने वाले विदेशी नागरिकों के लिए वीजा और पंजीकरण के पूरे प्रोसेस को आसाना, सुरक्षित और तेज बनाना है। ये सरकारी योजना, विदेशी नागरिकों के लिए वीजा जारी करना, देश में प्रवेश करना (इमिग्रेशन) और भारत में रहने के दौरान उनके पंजीकरण जैसे प्रमुख कामों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ता है। इस योजना में विदेशी नागरिक घर बैठे ही ऑनलाइन भारतीय वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं, वीजा को एक्टेंड करा सकते हैं और साथ ही रजिस्ट्रेशन जैसी सेवाएं भी प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना से पहले जिन कागजी कार्यवाही में हफ्तों का समय लग जाता था, वो सारे काम अब डिजिटली बहुत कम समय में पूरे हो जाते हैं।
देश की सुरक्षा के लिए बहुत अहम है IVFRT
IVFRT स्कीम सिर्फ विदेशी नागरिकों को ही सुविधाएं प्रदान नहीं करता बल्कि सरकार की भी काफी मदद करता है। इतना ही नहीं, ये देश की सुरक्षा को लेकर भी काफी महत्वपूर्ण है। IVFRT की मदद से भारत सरकार, देश में प्रवेश करने वाले विदेशी नागरिकों को आसानी से ट्रैक करने में सक्षम होती है। ये सिस्टम देश की सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध विदेशियों की गतिविधियों और प्रवास की अवधि पर नजर रखने में मदद करता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है।







































