आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंफोसिस के शेयरों में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के कमजोर आउटलुक और उम्मीद से कम ग्रोथ गाइडेंस के चलते निवेशकों ने जमकर बिकवाली की, जिससे शेयर करीब 4 फीसदी तक टूट गया और 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है।
शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इंफोसिस का शेयर 3.91 फीसदी गिरकर 1,193.90 रुपये पर पहुंच गया, जो इसका 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर यह 3.75 फीसदी टूटकर 1,194 रुपये पर कारोबार करता दिखा। इस गिरावट के चलते कंपनी का मार्केट कैप भी करीब 19,500 करोड़ रुपये घटकर 4.84 लाख करोड़ रुपये के आसपास रह गया।
कमजोर गाइडेंस से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कंपनी की FY27 के लिए दी गई ग्रोथ गाइडेंस है। इंफोसिस ने अगले वित्त वर्ष के लिए 1.5 से 3.5 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया है, जो बाजार की उम्मीदों से कम है। ब्रोकरेज रिपोर्ट्स का कहना है कि कंपनी का यह आउटलुक निवेशकों को निराश करने वाला है, जिससे शेयर पर दबाव बना।
तिमाही नतीजे भी उम्मीद से कम
इंफोसिस के चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे भी बाजार की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे। कंपनी का रेवेन्यू और मार्जिन अनुमान से थोड़ा कमजोर रहा, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ। हालांकि, कंपनी का शुद्ध मुनाफा जनवरी-मार्च तिमाही में 20.8 फीसदी बढ़कर 8,501 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले बेहतर है।
AI और ग्लोबल माहौल का असर
कंपनी के CEO सलिल पारेख के अनुसार, आने वाले समय में AI सेवाओं में बड़े अवसर दिख रहे हैं। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया में तनाव, का असर बिजनेस माहौल पर पड़ा है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से पारंपरिक आईटी सेवाओं के बिजनेस पर दबाव बन रहा है, जिससे ग्रोथ सीमित हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
इंफोसिस के शेयर में आई यह गिरावट संकेत देती है कि फिलहाल आईटी सेक्टर चुनौतियों का सामना कर रहा है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में फैसले न लें और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करें।







































