भारत में रेल यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि अब रेगुलर ट्रेनों में कन्फर्म सीट मिलना काफी मुश्किल होता जा रहा है। कन्फर्म सीट न मिलने पर यात्रियों को मजबूरी में वेटिंग लिस्ट टिकट बुक करना पड़ता है, इस उम्मीद में कि उनकी टिकट कन्फर्म हो जाएगी। हालांकि, जब वेटिंग लिस्ट काफी लंबी होती है तो ऐसे में टिकट कन्फर्म होना काफी मुश्किल हो जाता है। लेकिन, कुछ मामलों में सामान्य यात्रियों की लंबी वेटिंग लिस्ट वाली टिकट कन्फर्म हो जाती है। ऐसा रेलवे के HO (Highquarter) कोटा से संभव हो सकता है। HO कोटा को हाई ऑफिशियल कोटा या इमरजेंसी कोटा भी कहा जाता है।
HO कोटा क्या होता है
HO कोटा एक चर्चित कोटा है, जो मुख्य रूप से वीआईपी, बड़े राजनेता, सरकारी अधिकारियों और मेडिकल इमरजेंसी के लिए होता है। मेडिकल इमरजेंसी के तहत, सामान्य नागरिक भी इस कोटा का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए आपको ट्रेन का चार्ट बनने से कम से कम 10-12 घंटे पहले एक ऐप्लिकेशन देना होता है। ये ऐप्लिकेशन मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ऑफिस या मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक (CCM) ऑफिस में टिकट की कॉपी के साथ देना होता है। अगर मेडिकल इमरजेंसी है तो आपको इलाज से जुड़े कागज भी लगाने होंगे। हालांकि, आपको एक बात का खास ध्यान रखना होगा कि इमरजेंसी में ये वेटिंग लिस्ट टिकट को कन्फर्म कराने का एक विकल्प है और ये आपको कन्फर्म सीट की गारंटी नहीं देता है।
सांसद, विधायक की मदद से भी कन्फर्म हो सकती है टिकट
HO कोटा लगवाने के लिए आप अपने सांसद, विधायक या क्लास-1 सरकारी अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं। अगर वे अपने लेटरहेड पर आपके लिए सिफारिश लिखते हैं तो आप लेटरहेड के साथ टिकट की डिटेल्स और इलाज से जुड़े कागज लगाकर रेलवे कार्यालय में जमा कर सकते हैं। मेडिकल इमरजेंसी के अलावा, परीक्षा, शादी, मृत्यु के मामलों में भी इस कोटा का इस्तेमाल हो सकता है। बताते चलें कि भारतीय रेल के पास सभी ट्रेनों की सभी श्रेणियों में कुछ सीटें हमेशा रिजर्व रहती हैं। ये सीटें मुख्य रूप से कोटा के लिए रिजर्व रखी जाती हैं। जब कोटा के तहत सीटों के लिए ऐप्लिकेशन नहीं मिलता है तो इन्हीं सीटों को वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को अलॉट कर दिया जाता है।







































