शेयर बाजार के निवेशकों से जुड़ी बड़ी संस्था सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बड़ा एक्शन लिया है। साइबर सुरक्षा में गंभीर लापरवाही के चलते बाजार नियामक ने CDSL पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नवंबर 2022 में हुए उस बड़े मालवेयर हमले के बाद की गई है, जिसने CDSL की कई जरूरी सेवाओं को घंटों तक प्रभावित कर दिया था।
SEBI की जांच में सामने आया कि CDSL ने इंटरनेट से जुड़े अपने एक महत्वपूर्ण सर्वर को क्रिटिकल एसेट की कैटेगरी में शामिल ही नहीं किया। इतना ही नहीं, इस सर्वर का समय पर वल्नरेबिलिटी असेसमेंट एंड पेनेट्रेशन टेस्टिंग (VAPT) भी नहीं कराया गया। अगस्त 2022 में SEBI ने इन कमियों की ओर ध्यान दिलाया था, लेकिन CDSL ने इन्हें समय रहते दूर नहीं किया। जांच में यह भी पता चला कि हमलावर नवंबर 2021 में ही CDSL के सिस्टम में प्रवेश कर चुके थे, जबकि मालवेयर अटैक का खुलासा नवंबर 2022 में हुआ।
46 घंटे तक प्रभावित रही बाजार की सेवाएं
मालवेयर हमले का असर काफी बड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, 547 सर्वरों में से 135 और 506 कंप्यूटर व लैपटॉप में से 177 संक्रमित हो गए थे। इसके कारण सेटलमेंट, पे-इन, पे-आउट, इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर और प्लेज जैसी कई अहम सेवाएं प्रभावित हुईं। SEBI के मुताबिक, सेटलमेंट सिस्टम करीब 46 घंटे तक बाधित रहा। चूंकि CDSL भारतीय शेयर बाजार का अहम हिस्सा है, इसलिए इसका असर पूरे सिक्योरिटी मार्केट पर भी देखने को मिला।
पूर्व अधिकारियों को मिली राहत
इस मामले में CDSL के पूर्व चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर (CISO) राजेश नाडकर्णी और पूर्व चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) अमित महाजन के खिलाफ भी जांच हुई। हालांकि SEBI ने माना कि ये फैसले केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं लिए गए थे, बल्कि कई समितियों और बोर्ड की मंजूरी से जुड़े थे। इसलिए दोनों अधिकारियों पर कोई आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया गया।
CDSL को 45 दिनों में भरना होगा जुर्माना
SEBI ने CDSL पर SEBI एक्ट के तहत ₹90 लाख और डिपॉजिटरीज एक्ट के तहत ₹10 लाख, यानी कुल ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया है। कंपनी को यह राशि 45 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है। SEBI ने साफ कहा कि डिपॉजिटरी जैसी संस्थाओं की साइबर सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इससे पूरे शेयर बाजार की विश्वसनीयता और निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।






































