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मुंबई के बांद्रा स्थित आइकॉनिक गैटी गैलेक्सी थिएटर को पुलिस ने सोमवार को बंद करा दिया। थिएटर में हनुमान अंश लगी थी, लेकिन शो के पहले ही केबल वायर जलने से दर्शकों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसी थिएटर में लगे मिर्जापुर के पोस्टर भी फाड़े गए। पुलिस के पहुंचने के बाद दस्तावेजों की जांच में लाइसेंस से जुड़ी गड़बड़ी सामने आई। सोमवार को हनुमान अंश दिखाई जा रही थी। कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता ये फिल्म देखने पहुंचे थे, लेकिन केबल जलने से शो शुरू नहीं हो सका। वहां पहुंचे लोगों ने फिल्म शुरू न होने पर विरोध में जमकर हंगामा किया। वहां मौजूद स्टाफ से बहस बढ़ने के बाद उन्होंने कथित तौर पर मिर्जापुर: द मूवी के पोस्टर फाड़ दिए। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाया गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि थिएटर का लाइसेंस 2021-22 में ही खत्म हो चुका है। तब से लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाया गया है। इसके बाद नियमों का पालन नहीं होने के कारण थिएटर मैनेजमेंट को परिसर बंद करने और शो रोकने का निर्देश दिया गया। बांद्रा पुलिस ने थिएटर के मालिक, मैनेजर और सिनेमा चलाने वाली कंपनी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत केस दर्ज किया है। थिएटर के बाहर 12 नोटिस चिपकाए गए थिएटर की दीवारों के बाहर 12 नोटिस चिपकाए गए हैं। इनमें शो बंद होने की जानकारी दी गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मिड-डे से कहा, “थिएटर के पास वैध लाइसेंस नहीं था। इसलिए हमने मैनेजमेंट को इसे तुरंत बंद करने का आदेश दिया।” एक अन्य अधिकारी ने बताया, “हर थिएटर को चलाने के लिए एंटरटेनमेंट लाइसेंस जरूरी है। यह लाइसेंस फोर्ट में क्रॉफर्ड मार्केट के पास स्थित मुंबई पुलिस हेडक्वार्टर से जारी होता है। गैटी-गैलेक्सी का लाइसेंस 2021-22 से रिन्यू नहीं हुआ था।” थिएटर मालिक मनोज देसाई बोले- लाइसेंस से जुड़ी खबरें फर्जी थिएटर के मालिक और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनोज देसाई ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में लाइसेंस रिन्यू न करवाने के दावों का खंडन किया है। उन्होंने टेक्निकल सुधार के चलते थिएटर बंद होने की बात कही है। उनके अनुसार, थिएटर के अंदर कुछ केबल जल गई थीं। इन्हें बदलने के लिए दक्षिण मुंबई के लोहार चॉल से नई केबल मंगाई गई है। मैनेजमेंट का कहना है कि समस्या ठीक होते ही शोज दोबारा शुरू कर दिए जाएंगे। 1972 में शुरू हुआ था गैटी-गैलेक्सी मुंबई के सबसे पहचान वाले सिनेमाघरों में शामिल गैटी-गैलेक्सी की शुरुआत 1972 में हुई थी। शुरुआत में यहां तीन स्क्रीन थीं, गैटी, गैलेक्सी और जेमिनी। बाद में चार और स्क्रीन,ग्लैमर, जेम, गॉसिप और ग्रेस जोड़ी गईं। इन सातों स्क्रीन को मिलाकर यह कॉम्प्लेक्स G7 के नाम से मशहूर हुआ। मुंबई के सिंगल स्क्रीन और मास ऑडियंस वाले सिनेमाघरों में गैटी-गैलेक्सी की खास पहचान रही है। 7 स्क्रीन से रोज 17-18 लाख रुपए तक के नुकसान का अनुमान ट्रेड एनालिस्ट गिरीश वानखेड़े ने थिएटर के संभावित नुकसान का आकलन किया। उन्होंने बताया कि गैटी-गैलेक्सी में करीब 7 स्क्रीन हैं। एक स्क्रीन से एक शो में औसतन 1 से 1.5 लाख रुपए की कमाई हो सकती है। इसमें थिएटर का हिस्सा करीब 50 हजार रुपए होता है। वानखेड़े के मुताबिक, एक दिन में हर स्क्रीन पर करीब 2.5 लाख रुपए का नुकसान हो सकता है। 7 स्क्रीन के हिसाब से यह नुकसान रोज करीब 17 से 18 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि अगर थिएटर 7 दिन बंद रहता है, तो नुकसान 1 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है। उनके मुताबिक, यह बंदी हफ्ते के ऐसे समय में हुई है, जब टॉक्सिक और मिर्जापुर: द मूवी जैसी मास-ओरिएंटेड फिल्में चल रही हैं। गिरीश वानखेड़े ने कहा कि गैटी ऐसे थिएटरों में शामिल है, जहां ओवर-द-टॉप पॉटबॉयलर और मास फिल्मों को अच्छी भीड़ मिलती है। इसलिए थिएटर मालिक एक अहम कारोबारी दौर का नुकसान उठा रहे हैं। पहली फिल्म थी ‘सीता और गीता’ गैटी-गैलेक्सी में पहली फिल्म रमेश सिप्पी की ‘सीता और गीता’ रिलीज हुई थी। 24 नवंबर 1972 को इसकी शुरुआत हुई थी। उस दौर में सिंगल स्क्रीन थिएटर ही फिल्मों की लोकप्रियता का सबसे बड़ा पैमाना हुआ करते थे और गैटी-गैलेक्सी ने जल्द ही मुंबई में अपनी अलग पहचान बना ली।





































