
फिक्स्ड डिपॉजिट जिसे आप एफडी भी कहते हैं, लंबे समय से उन निवेशकों की पहली पसंद रहे हैं, जो अपनी बचत को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से बढ़ाना चाहते हैं। बैंकों या अन्य वित्तीय संस्थानों की तरफ से अब कॉलएबल (Callable) और नॉन-कॉलएबल (Non-Callable) एफडी के विकल्प आने से निवेशकों को अपनी जरूरत और लक्ष्य के अनुसार ज्यादा रणनीतिक निवेश का अवसर मिल रहा है। लेकिन निवेश से पहले यहां यह भी समझना भी जरूरी है कि इन दोनों में किसका चुनाव बेहतर है।
callable बैंक एफडी क्या है?
कॉलएबल फिक्स्ड डिपॉजिट, जिसे सामान्य एफडी भी कहा जाता है, निवेशकों को परिपक्वता (मैच्योरिटी) तिथि से पहले आंशिक या पूरी राशि निकालने की सुविधा देता है। हालांकि, समय से पहले निकासी पर बैंक और एनबीएफसी जुर्माना या पेनल्टी लगा सकते हैं। यह लचीलापन ही इस योजना की खासियत है।
कॉलएबल एफडी की विशेषताएं और फायदे
कॉलएबल एफडी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जरूरत पड़ने पर मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाला जा सकता है। भले ही इस पर पेनल्टी लगे, लेकिन आकस्मिक वित्तीय जरूरतों में यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। कॉलएबल एफडी में निवेश अवधि और राशि का चयन अपनी वित्तीय योजना के अनुसार किया जा सकता है। हालांकि इन पर ब्याज दरें कुछ कम हो सकती हैं, लेकिन लचीलापन इसकी भरपाई कर देता है। इन एफडी में न्यूनतम निवेश राशि अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे छोटे निवेशक भी आसानी से इसमें निवेश कर सकते हैं और अपने पोर्टफोलियो में विविधता ला सकते हैं।
Non callable बैंक एफडी क्या है?
नॉन-कॉलएबल फिक्स्ड डिपॉजिट एक ऐसी सुरक्षित निवेश योजना है, जिसमें जमा राशि को तय अवधि तक लॉक-इन रखा जाता है। इसमें समय से पहले निकासी की अनुमति नहीं होती। आमतौर पर इसमें शुरुआती निवेश राशि अधिक होती है, लेकिन इसके बदले आकर्षक और अधिक ब्याज दर मिलती है।
नॉन-कॉलएबल एफडी की विशेषताएं और फायदे
नॉन-कॉलएबल एफडी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि निवेशक को मैच्योरिटी पर पूरी राशि के साथ अधिक ब्याज मिलने की गारंटी होती है, जो कॉलएबल एफडी की तुलना में ज्यादा हो सकती है। इन एफडी में समय से पहले निकासी बेहद सीमित परिस्थितियों-जैसे खाताधारक की मृत्यु या दिवालियापन में ही संभव होती है। इससे निवेश सुरक्षित रहता है। निवेश तय अवधि तक लॉक रहता है, जिससे पूंजी सुरक्षित रहते हुए स्थिर दर से बढ़ती रहती है।
कॉलएबल और नॉन-कॉलएबल एफडी के चुनाव के वक्त दें ध्यान
नॉन-कॉलएबल एफडी आमतौर पर अधिक ब्याज दर देती हैं, क्योंकि राशि तय अवधि तक लॉक रहती है। वहीं, कॉलएबल एफडी में समय से पहले निकासी की सुविधा के कारण ब्याज दर थोड़ी कम हो सकती है। एक्सिस बैंक के मुताबिक, अगर निवेशक को भविष्य में धन की जरूरत पड़ने की संभावना है, तो कॉलएबल एफडी बेहतर विकल्प हो सकती है। दूसरी ओर, जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि में सुरक्षित और स्थिर रिटर्न पाना है, उनके लिए नॉन-कॉलएबल एफडी अधिक उपयुक्त मानी जाती है।






































