वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर शुरू हुई चर्चा के बीच सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और दूसरे जजों के साथ कोई बैठक नहीं हो रही है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की ओर से इस बारे में सफाई दी गई है। दरअसल, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वन नेशन, वन इलेक्शन के मुद्दे पर ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी JPC चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट के जजों से मुलाकात कर चर्चा करने वाली है।
CJI और दूसरे जज नहीं कर रहे ऐसी कोई बैठक
बता दें कि कपिल सिब्बल ने इस तरह की बैठक को लेकर सवाल उठाते हुए इसे संविधान के खिलाफ बताया था। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि ऐसी कोई बैठक नहीं हो रही है। यह सफाई सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की ओर से जारी की गई है।
सिब्बल ने प्रस्तावित मुलाकात को बताया था असंवैधानिक
Live Law में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि संविधान (129वां संशोधन) बिल, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2024 की जांच करने वाली JPC, जो एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना चाहती है, 6 अक्टूबर को भारत के सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों के साथ चर्चा करने वाली है। कपिल सिब्बल ने प्रस्तावित बातचीत की आलोचना की थी और इसे ‘अभूतपूर्व’ और ‘असंवैधानिक’ कहा था।
कानून के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में दी जा सकती है चुनौती
सिब्बल ने तर्क दिया कि इससे शक्तियों के बंटवारे को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं। खासकर इसलिए क्योंकि कमेटी उन प्रस्तावित संशोधनों की पड़ताल कर रही है जिन्हें कानून बनने के बाद सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
JPC ने कैसे सीजेआई से वक्त मांग लिया
कपिल सिब्बल ने ये भी पूछा था, ‘JPC कैसे सीजेआई से उन्हें सुनने का वक्त मांगे, ताकि सुप्रीम कोर्ट के जजों को बिल की शर्तों के बारे में जानकारी दी जाए, जबकि JPC ने अभी रिपोर्ट को अंतिम रूप भी नहीं दिया है? अदालत ने संयुक्त समिति का वह निमंत्रण कैसे स्वीकार कर लिया, जबकि वह अच्छी तरह जानती थी कि यह बिल भारत की शासन-व्यवस्था और संविधान के कामकाज से जुड़े बुनियादी महत्व के मुद्दों को उठाता है?’







































