सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़े FIR रद्द करने के अपने फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में मांग की गई थी कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR की जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट के सामने युवा छात्र हैं। हमें उनके माता-पिता और उनकी पूरी जिंदगी के बारे में भी सोचना होगा। हम नहीं चाहते कि ये युवा कानूनी मामलों में उलझें और उन्हें बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने पड़ें।
याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि लोगों को यह संदेश जाना चाहिए कि अदालतों को कोई अपनी निजी संपत्ति न समझे और कानून का पालन करे। इस पर CJI ने कहा कि दूसरे मामलों में भी सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द की हैं। ऐसे मामलों में सांसदों और विधायकों के धरने और कोविड के दौरान हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामले भी शामिल थे। कोर्ट ने उन मामलों में यह देखते हुए राहत दी थी कि संबंधित लोग आदतन अपराधी नहीं थे।
CJI ने कहा कि मौजूदा याचिका असल में सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग कर रही है। याचिकाकर्ता का कहना था कि FIR रद्द करने का फैसला गलत था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने का दिया था भरोसा
बता दें कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई को संसद तक मार्च में शामिल होने वालों के खिलाफ केस दर्ज न करने को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया था। जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर थे। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म किया था। केंद्र सरकार ने वांगचुक को भरोसा दिया था कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं होगी। साथ ही जिन प्रदर्शनकारियों पर FIR हुई है, उन्हें वापस लिया जाएगा।
CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की क्यों नहीं मिली इजाजत?
उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं मिली है। पुलिस ने प्रदर्शन करने की इजाजत क्यों नहीं दी, इसकी वजह भी बताई गई है। ज्वाइंट सीपी नूपुर प्रसाद ने कहा कि 7 अक्टूबर को सीजेपी ने नई दिल्ली जिला अधिकारियों को एक अर्ज़ी दी, जिसमें बताया गया कि वे 10 तारीख को CEC की जवाबदेही को लेकर विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं।
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