24 मिनट पहले
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धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने एक साथ 30 से अधिक फिल्मों में काम किया है।
एक मुहब्बत जो सिनेमा के पर्दे पर चल रही थी, एक मुहब्बत जो जिंदगी में।
पर्दे पर प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए गाता, “पहली नजर में हमने तो अपना दिल दे दिया था तुमको।”
प्रेमिका जवाब में कहती, “तुम्हें दिल में बंद कर लूं, दरिया में फेंक दूं चाबी।”
जब विरह की रात बहुत लंबी हो जाती और नींद न आती तो प्रेमिका के दिल से हूक उठती-
“ख्वाब बनकर कोई आएगा तो नींद आएगी
अब वही आकर सुलाएगा तो नींद आएगी।”
अगर आप सिनेमा और मुहब्बत, दोनों के दीवाने हैं और उस दौर में बड़े हुए हैं, जब इंस्टाग्राम और रील्स नहीं हुआ करते थे।
अगर आपने अनगिनत रातें अपने ट्रांजिस्टर को कान से सटाकर विविध भारती सुनते हुए गुजारी हैं तो आप समझ ही गए होंगे कि हम बात कर रहे हैं हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की और उस प्रेम कहानी की, जिसका सफर असल जिंदगी में रुपहले पर्दे की तरह सीधा और आसान नहीं था।
बीच में दुनियादारी की ऊंची दीवार थी। धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा और चार बच्चों के पिता थे। हेमा के घरवाले ही नहीं, एक तरह से पूरी फिल्म इंडस्ट्री ही इस शादी के पक्ष में नहीं थी। फिर भी दुनियादारी की कोई दीवार इस प्यार के दरिया को बहने से रोक नहीं पाई। लड़की ने अपने प्रेमी को दिल में कैद कर लिया और चाबी दरिया में बहा दी।
धर्मेंद्र तब से हेमा मालिनी के दिल में रहते हैं, हालांकि दोनों साथ एक घर में नहीं रहते।
अब धर्मेंद्र इस दुनिया में नहीं हैं। अपना 90वां जन्मदिन मनाने से बस कुछ दिन पहले वे इस फानी दुनिया को विदा कह गए। इस वक्त हेमा जी के दिल में यादों का जाने कैसा बवंडर घूम रहा होगा।
ठीक वैसी तो नहीं, लेकिन उनके प्रेम की ढेरों यादें लोगों के दिलों में आज भी जिंदा हैं। अनेकों किताबों में बार–बार उन कहानियों का जिक्र हुआ है। फिल्म पत्रकार, क्रिटिक और लेखिका भावना सोमाया ने हेमा मालिनी की जीवनी लिखी है- ‘हेमा मालिनी: द ऑथराइज्ड बायोग्राफी।’ इस किताब में हेमा मालिनी के जन्म से लेकर उनके फिल्मी सितारे बनने तक के पूरे सफर की दास्तान को बहुत दिल्लगी और साफगोई से बयान किया गया है।
1970 के दशक में इस प्रेम कहानी की शुरुआत हुई थी।

धर्मेंद्र को ‘ही मैन’ और हेमा मालिनी को ‘ड्रीम गर्ल’ के नाम से भी बुलाया जाता है।
पहली मुलाकात
दोनों की पहली मुलाकात 1965 में फिल्मकार ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म आसमान महल के प्रीमियर में हुई थी। हेमा ने सिमी गरेवाल के शो में बताया था कि जब उन्होंने धर्मेंद्र को पहली बार देखा, तो सोचा- “मैंने इतना हैंडसम आदमी पहले कभी नहीं देखा।”
लड़का हैंडसम था तो क्या? पहले से शादीशुदा था। बस एक ख्याल था, दिल में आया और चला गया। हेमा के घरवाले यूं भी काफी सख्त थे। उन्हें फिल्मों में काम करने की इजाजत थी, मुहब्बत की पींगे बढ़ाने की नहीं, लेकिन दिल पर किसी का जोर कभी चला है, जो अब चलता। ये तो वो आतिश है कि जो लगाए न लगे और बुझाए न बुझे।
जब पहली बार दोनों फिल्म के सेट पर मिले
ये 1968 की बात है। ‘जानवर’ और ‘ब्रम्हचारी’ जैसी सुपरहिट फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर भप्पी सोनी एक फिल्म बना रहे थे, ‘तुम हसीन, मैं जवां।’ फिल्म के लिए धर्मेंद्र और हेमा को कास्ट किया गया।
हेमा की उम्र 20 साल थी और धर्मेंद्र 33 साल के। बतौर लीड हीरोइन हेमा के करियर की यह तीसरी फिल्म थी। धर्मेंद्र 50 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके थे। हेमा अभी शुरुआत ही कर रही थीं और धर्मेंद्र अपने करियर के शिखर पर थे।

फिल्म तुम हसीन मैं जवां में धर्मेंद्र (सुनील) और हेमा मालिनी (अनुराधा) दोनों प्रेमी थे।
फिल्म के सेट पर पहली बार दोनों की रू-ब-रू मुलाकात हुई। दो साल बाद 24 जुलाई 1970 को फिल्म सिनेमा हॉल में रिलीज हुई, लेकिन तब तक फिल्म की कहानी कुछ-कुछ असल जिंदगी में भी दोहराई जाने लगी थी।
हेमा हसीन थीं और धर्मेंद्र जवान। प्रेम की चिनगारी धीरे-धीरे सुलगने लगी थी। हालांकि दोनों जानते थे कि इस रिश्ते का कोई भविष्य नहीं है, लेकिन मुहब्बत तो आज में जीती है। उसे कल की क्या परवाह।
इसके बाद दोनों ने नया जमाना (1971), सीता और गीता (1972) और राजा जानी (1972) जैसी फिल्मों में भी साथ काम किया।

ड्रीमगर्ल के दो दीवाने
अपने जमाने के सुपरस्टार संजीव कुमार भी हेमा मालिनी से मन-ही-मन बहुत प्रेम करते थे। हालांकि इस मुहब्बत का इजहार करने की हिम्मत उनमें नहीं थी। फिल्म सीता और गीता का वो गाना याद है-
“हवा के साथ-साथ, घटा के संग-संग, ओ साथी चल
कि मुझे लेकर साथ चल तू, यूं ही दिन-रात चल तू”
अपने दिल की यही बात संजीव खुद हेमा से कहना चाहते थे। जानती तो हेमा भी थीं कि संजीव को उनसे मुहब्बत है। भावना सोमाया अपनी किताब में लिखती हैं कि संजीव कुमार ने अपनी मुहब्बत का पैगाम लेकर जीतेंद्र को हेमा मालिनी के पास भेजा, लेकिन हेमा ने इनकार कर दिया। संजीव कुमार का दिल टूट गया और फिर उन्होंने कभी शादी नहीं की।

संजीव कुमार और हेमा मालिनी ने ‘सीता और गीता’, ‘धूप छांव’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया है।
जब पूरी रात बजती रही फोन की घंटी, मुंबई से धर्मेंद्र का फोन था
वक्त गुजरा और एक लम्हा ऐसा भी आया कि जब अपने दोस्त की मुहब्बत का पैगाम लेकर जाने वाले जीतेंद्र खुद हेमा के प्यार में पड़ गए। उन्होंने इजहार–ए–मुहब्बत भी कर डाला। बैंगलोर में फिल्म ‘दुल्हन’ की शूटिंग के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी थीं।
हेमा दिल–ही–दिल में धर्मेंद्र को चाहती तो थीं, लेकिन जैसे ही कदम आगे बढ़ाने को होतीं, धर्मेंद्र की पत्नी प्रकाश कौर और उनके चारों बच्चे बीच में आ जाते। यह एक ख्याल तो था, जो डराता था।
आखिरकार हेमा मालिनी ने जीतेंद्र का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। फिल्म दुल्हन की शूटिंग खत्म कर हेमा मालिनी अपने पेरेंट्स के घर चेन्नई चली गई थीं। जीतेंद्र भी अपने माता-पिता को लेकर वहां पहुंच गए। दोनों परिवारों के बीच शादी की बात चल रही थी। तभी धर्मेंद्र को इस बात की भनक लग गई।

जीतेंद्र और हेमा ने न्याय और कानून, जस्टिस चौधरी और कैदी जैसी फिल्मों में काम किया है।
भावना सोमाया लिखती हैं कि उस रात हेमा के घर की फोन की घंटी पूरी रात बजती ही रही। हर थोड़ी देर पर मुंबई से ट्रंक कॉल आता। फोन के उस तरफ धर्मेंद्र थे। अपने प्यार का इजहार करते, इसरार करते, मिन्नतें करते, ताउम्र मुहब्बत का वादा निभाने का वादा करते धर्मेंद्र।
ये कोई झूठा वादा नहीं था। धर्मेंद्र ने एक बार भी नहीं कहा कि मैं अपनी पत्नी और बच्चों को तुम्हारे लिए छोड़ दूंगा। बस इतना कहा था कि तुम्हारा हाथ, तुम्हारा साथ कभी नहीं छोडूंगा।
घरवाले अब भी राजी नहीं थे, लेकिन हेमा का दिल तब तक राजी हो चुका था।
धर्मेंद्र, जीतेंद्र की उस समय की गर्लफ्रेंड शोभा को साथ लेकर चेन्नई पहुंचे और उसी की मदद से जीतेंद्र और हेमा की शादी को रुकवा दिया।
धर्मेंद्र ने हेमा मालिनी के लिए किया वीरू का रोल
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी का रिश्ता फिल्म शोले के सेट पर परवान चढ़ा।
फिल्म शोले में डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने संजीव कुमार को ठाकुर बलदेव सिंह का रोल देने का फैसला किया क्योंकि वे हर तरह के किरदार निभाने में माहिर थे।
दैनिक भास्कर को हाल ही में दिए इंटरव्यू में रमेश सिप्पी ने बताया था कि धर्मेंद्र शुरू में फिल्म को लेकर असमंजस में थे। वो ठाकुर का रोल करना चाहते थे। उन्होंने रमेश सिप्पी से कहा कि ठाकुर की फिल्म है, तो ठाकुर का रोल वे ही निभाएंगे।
जिस पर रमेश सिप्पी ने कहा था कि अगर वो ठाकुर बनते, तो वीरू का किरदार संजीव कुमार निभाते और उन्हें हेमा मालिनी के साथ रोमांस करने का मौका मिलता। इसी वजह से धर्मेंद्र ने फिल्म में वीरू का रोल करने का फैसला किया।

शोले में धर्मेंद्र यानी वीरू की प्रेमिका बसंती थी। इस किरदार को हेमा मालिनी ने निभाया था।
संजीव कुमार ने हेमा मालिनी को दूसरी बार प्रपोज किया था
शोले की शूटिंग के दौरान हेमा मालिनी और धर्मेंद्र एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। संजीव कुमार को इस बात की जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने सेट पर एक बार फिर हेमा को शादी के लिए प्रपोज कर दिया।
यह बात सुनकर हेमा और धर्मेंद्र, दोनों बहुत परेशान हो गए। धर्मेंद्र गुस्से में आ गए और फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी से कहा कि सेट पर थोड़ा डेकोरम बनाए रखें। उन्होंने यह भी रिक्वेस्ट की कि हेमा और संजीव कुमार को एक साथ कोई सीन न दिया जाए।
क्योंकि उस वक्त धर्मेंद्र बड़े स्टार थे और फिल्म का अहम हिस्सा भी, इसलिए रमेश सिप्पी ने उनकी बात मान ली।
इसी वजह से पूरी फिल्म में ठाकुर (संजीव कुमार) और बसंती (हेमा मालिनी) का एक भी सीन साथ में नहीं दिखाया गया।
दूसरी शादी से पहले धर्म बदलना पड़ा
साल 1980 में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने शादी करने का फैसला किया, लेकिन धर्मेंद्र की पत्नी प्रकाश कौर उन्हें तलाक देने को तैयार नहीं थीं, इसलिए लीगली दूसरी शादी करने के लिए उन्होंने गुपचुप तरीके से इस्लाम धर्म अपनाया और फिर हेमा से निकाह किया।
बाद में दोनों ने अय्यंगर रीति-रिवाजों से भी शादी की क्योंकि हेमा अय्यंगर ब्राह्मण परिवार से थीं। हेमा की शादी उनके भाई के घर से हुई थी। कहा जाता है कि धर्मेंद्र और हेमा दोनों ही इसी तरह से शादी करना चाहते थे

धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की शादी 2 मई, 1980 को प्राइवेट सेरेमनी में हुई थी।
धर्मेंद्र के पिता हेमा मालिनी को बहुत पसंद करते थे
‘हेमा मालिनी: बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल’ के मुताबिक धर्मेंद्र के पिता केवल कृष्ण सिंह देओल, हेमा और उनकी फैमिली को बहुत पसंद करते थे।
किताब में बताया गया है कि केवल कृष्ण सिंह देओल अक्सर चाय पर हेमा के पिता और भाई से मिला करते थे। इस दौरान वे पंजे भी लड़ाया करते थे और उन्हें (हेमा के पिता और भाई को) हराने के बाद मजाक करते हुए कहते थे, तुम लोग घी मक्खन लस्सी खाओ। इडली और सांभर से ताकत नहीं आती। इसके बाद वे खूब हंसते थे।
धर्मेंद्र की मां ने दिया था खुश रहने का आशीर्वाद
किताब ‘हेमा मालिनी: बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल’ में धर्मेंद्र की मां सतवंत कौर के साथ हेमा के रिश्ते का जिक्र भी किया गया है। हेमा के मुताबिक धरम जी की मां सतवंत कौर बहुत ही अच्छी महिला थीं। मुझे याद है कि एक बार वे मुझसे मिलने जुहू के एक डबिंग स्टूडियो में आई थीं।
उस वक्त ईशा मेरे पेट में थी। मुलाकात पर मैंने उनके पैर छुए, जिस पर उन्होंने कहा कि बेटा हमेशा खुश रहो। मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई थी।
ईशा के जन्म पर धर्मेंद्र ने पूरा नर्सिंग होम बुक कराया
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की शादी से उनकी दो बेटियां ईशा देओल और अहाना देओल हुई हैं। टीवी शो ‘जीना इसी का नाम है’ में हेमा की करीबी दोस्त नीतू कोहली ने बताया था कि जब हेमा प्रेग्नेंट थीं, तब धर्मेंद्र ने पूरा डॉ. दस्तूर नर्सिंग होम बुक कर लिया था। करीब 100 कमरे बुक किए गए थे।

हेमा और धर्मेंद्र की पहली बेटी ईशा का जन्म 2 नवंबर 1981 और दूसरी बेटी अहाना का 28 जुलाई 1985 को हुआ था।
हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की पहली पत्नी को लेकर क्या कहा था?
हेमा मालिनी ने हमेशा धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर का सम्मान किया है। हेमा ने धर्मेंद्र की पहली पत्नी को लेकर किताब ‘हेमा मालिनी: बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल’ में कहा था, “भले ही मैं कभी प्रकाश (धर्मेंद्र की पहली पत्नी) के बारे में बात नहीं करती, लेकिन मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं। मेरी बेटियां भी धरम जी की फैमिली का पूरा सम्मान करती हैं। दुनिया मेरी लाइफ के बारे में विस्तार से जानना चाहती है, लेकिन यह दूसरों को बताने के लिए नहीं है। इससे किसी को मतलब नहीं होना चाहिए।”
धर्मेंद्र और हेमा की शादी को लेकर क्या बोली थीं पहली पत्नी?
साल 1981 में स्टारडस्ट मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर ने धर्मेंद्र और हेमा की शादी को लेकर कहा था कि सिर्फ मेरे पति ही क्यों, कोई भी मर्द हेमा को मुझसे ज्यादा पसंद करता। किसी को क्या हक है मेरे पति को औरतबाज कहने का, जब आधी इंडस्ट्री ऐसा ही कर रही है? लगभग हर हीरो के अफेयर चल रहे हैं और कई दूसरी बार शादी कर चुके हैं। हो सकता है धर्मेंद्र सबसे अच्छे पति न हों, लेकिन वे बहुत अच्छे पिता हैं। उनके बच्चे उनसे बहुत प्यार करते हैं और उन्होंने कभी बच्चों को नजरअंदाज नहीं किया।
प्रकाश कौर ने आगे कहा था कि मैं समझ सकती हूं कि हेमा किन हालात से गुजर रही हैं। उन्हें भी दुनिया और अपने परिवार का सामना करना पड़ता है, लेकिन अगर मैं हेमा की जगह होती, तो ऐसा नहीं करती। एक औरत के तौर पर मैं उनकी भावनाएं समझती हूं, लेकिन एक पत्नी और मां के रूप में मैं इस फैसले से सहमत नहीं हूं।

धर्मेंद्र अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर और बेटों बॉबी देओल और सनी देओल के साथ।
प्रकाश ने यह भी कहा था कि धर्मेंद्र मेरे जीवन के पहले और आखिरी आदमी हैं। वो मेरे बच्चों के पिता हैं और मैं उनसे बहुत प्यार और इज्जत करती हूं।
प्रकाश ने कहा था कि जो होना था, वो हो गया। मैं नहीं जानती कि इसके लिए धर्मेंद्र को दोष दूं या किस्मत को। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुझे कभी उनकी (धर्मेंद्र) जरूरत पड़ी, तो मुझे पता है वो मेरे लिए जरूर आएंगे। मैंने उन पर भरोसा करना नहीं छोड़ा क्योंकि वो मेरे बच्चों के पिता हैं।
आज धर्मेंद्र नहीं रहे, पर उनकी मुहब्बत, उनकी मुस्कान और हेमा के दिल में उनकी जगह हमेशा रहेगी।







































