दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने के नियम जल्द बदल सकते हैं। दिल्ली सरकार जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के जरिए होने वाली मकानों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। सरकार इस संबंध में कानूनी एक्सपर्ट्स से सलाह ले रही है। हिन्दुस्तान अखबर में छपी रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो GPA के जरिए केवल परिवार के सदस्यों को ही संपत्ति का अधिकार दिया जा सकेगा, जबकि किसी अन्य व्यक्ति को मकान बेचने के लिए रजिस्ट्री कराना अनिवार्य होगा।
आपको बता दें कि दिल्ली की कई अनधिकृत और कच्ची कॉलोनियों में आज भी लोग रजिस्ट्री की जगह GPA के जरिए मकान खरीदते और बेचते हैं। इससे कई बार एक ही संपत्ति कई लोगों को बेच दी जाती है और खरीदार ठगी का शिकार हो जाते हैं। सरकार का मानना है कि नए नियम लागू होने से ऐसे फर्जीवाड़े और प्रॉपर्टी विवादों में बड़ी कमी आएगी।
सरकार को भी होता है राजस्व का नुकसान
GPA के जरिए होने वाली खरीद-बिक्री में सरकार को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं मिल पाता। आमतौर पर लोग केवल 100 रुपये के स्टांप पेपर पर GPA बनाकर सौदा कर लेते हैं। जबकि रजिस्ट्री कराने पर महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने पर 5 प्रतिशत और पुरुषों के नाम पर 7 प्रतिशत तक स्टांप ड्यूटी देनी होती है। ऐसे में सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है।
PM-UDAY योजना से मिलेगा मालिकाना हक
सरकार चाहती है कि जिन लोगों के पास अभी तक संपत्ति का वैध मालिकाना हक नहीं है, वे PM-UDAY योजना के तहत आवेदन कर अपने मकान का मालिकाना हक प्राप्त करें। इसी तरह लाल डोरा क्षेत्रों में भी स्वामित्व योजना के जरिए लोगों को संपत्ति का अधिकार दिया जा रहा है। इसके बाद ही वे कानूनी रूप से रजिस्ट्री के माध्यम से अपनी संपत्ति बेच सकेंगे।
कानूनी राय के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले कानूनी पहलुओं की पूरी जांच की जा रही है। एक्सपर्ट्स यह तय करेंगे कि GPA के जरिए खरीद-बिक्री पर रोक किस कानूनी प्रावधान के तहत लगाई जा सकती है, ताकि भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद न हो।
क्या होता है GPA?
जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी ओर से कुछ काम करने का अधिकार देता है। हालांकि, केवल GPA के आधार पर संपत्ति की खरीद-बिक्री को पूर्ण कानूनी स्वामित्व का प्रमाण नहीं माना जाता। यही वजह है कि सरकार अब रजिस्ट्री आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देकर पारदर्शिता बढ़ाना और प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों पर रोक लगाना चाहती है।
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