देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। यात्रियों की संख्या और कंपनी की कमाई बढ़ने के बावजूद एयरलाइन घाटे में पहुंच गई। बढ़ती ईंधन कीमतों और ऑपरेटिंग खर्चों ने कंपनी की कमाई पर बड़ा असर डाला। यही वजह रही कि निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई।
IndiGo ने अप्रैल-जून तिमाही में 238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 2,176 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। हालांकि कंपनी की कुल आय 20 फीसदी बढ़कर 24,584 करोड़ रुपये पहुंच गई, लेकिन खर्चों में इससे भी ज्यादा तेजी आई। कुल परिचालन खर्च बढ़कर 25,853 करोड़ रुपये हो गया, जिससे कंपनी का मुनाफा नुकसान में बदल गया।
ईंधन की बढ़ती कीमत बनी सबसे बड़ी वजह
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती विमान ईंधन (ATF) की कीमतें रहीं। ईंधन पर खर्च एक साल में 86 फीसदी बढ़कर 10,833 करोड़ रुपये हो गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, जिसका सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ा। इसके अलावा विमानों की मरम्मत, किराया, कर्मचारियों का खर्च और फाइनेंस कॉस्ट भी बढ़ गई।
यात्रियों की संख्या बढ़ी, लेकिन मार्जिन घटा
IndiGo ने इस दौरान अपनी क्षमता बढ़ाई और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भी विस्तार किया। एयरलाइन अब 97 घरेलू और 46 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित कर रही है। हालांकि, यात्रियों से होने वाली कमाई बढ़ने के बावजूद कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन कमजोर हुआ। लोड फैक्टर भी पिछले साल के मुकाबले थोड़ा घटकर 83.3 फीसदी रह गया।
कैश मजबूत, लेकिन कर्ज भी बढ़ा
एक राहत की बात यह रही कि कंपनी के पास 52,885 करोड़ रुपये की मजबूत नकदी मौजूद है। हालांकि कुल कर्ज बढ़कर 81,531 करोड़ रुपये हो गया है। इससे आने वाले समय में ब्याज और वित्तीय लागत का दबाव बना रह सकता है।
आगे की राह पर रहेगी नजर
अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है तो एयरलाइंस की लागत पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि मजबूत यात्री मांग और अंतरराष्ट्रीय विस्तार से IndiGo को आने वाली तिमाहियों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी बढ़ती लागत पर कैसे कंट्रोल पाती है और दोबारा मुनाफे की राह पर कब लौटती है।






































