Highlights
- अदालत ने CBI को तीन दिन तक नए हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर लेने की अनुमति दी।
- CBI ने अदालत को बताया, फोरेंसिक जांच के लिए पहले दिए गए नमूने अपर्याप्त।
- बचाव पक्ष बोला, 60 पन्ने लिखवाए जा चुके, बार-बार नमूने लेना उत्पीड़न है।
नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी मनीषा संजय हवलदार की हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के अतिरिक्त नमूने लेने की इजाजत राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI को दे दी है। कोर्ट ने कहा कि फोरेंसिक जांच के लिए पहले लिए गए नमूने पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच के हित में नए नमूने लिए जा सकते हैं। स्पेशल सीबीआई जज अजय गुप्ता ने CBI की ओर से दाखिल आवेदन स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले से जुड़े दस्तावेजों की संख्या काफी अधिक है और GEQD ने भी बताया है कि पहले लिए गए हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के नमूने तुलना के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में CBI को आगे के नमूने लेने की इजाजत दी जाती है।
कोर्ट ने जेल अधीक्षक को दिए जरूरी निर्देश
कोर्ट ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि 27 जुलाई से 29 जुलाई 2026 तक 3 दिनों के दौरान जेल में स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में CBI अधिकारियों को आरोपी की हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के नमूने लेने के लिए आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ लोक अभियोजक नीतू सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपी मनीषा संजय हवलदार NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में शामिल है। जांच में सामने आया है कि उसने अपने हाथ से लिखे गए फिजिक्स के प्रश्न एक अन्य आरोपी मनीषा मांधरे को भेजे थे। बता दें कि NEET पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन और हंगामा जारी है।
‘बोलकर भी लिखवाए थे फिजिक्स के सवाल’
CBI ने यह भी बताया कि मनीषा हवलदार ने एक अन्य आरोपी तेजस हर्षद कुमार शाह को भी फिजिक्स के सवाल बोलकर लिखवाए थे। जांच के दौरान सह-आरोपी मनीषा मांधरे के मोबाइल फोन से हाथ से लिखे गए फिजिक्स के सवालों की तस्वीरें भी बरामद हुई हैं। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि आरोपी की हैंडराइटिंग का सैंपल लेने की इजाजत 30 मई 2026 के आदेश से मिल चुकी थी। लेकिन मामले में दस्तावेजों की संख्या काफी ज्यादा होने के कारण हर दस्तावेज की निष्पक्ष तरीके से फोरेंसिक तुलना करने के लिए अतिरिक्त हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के नमूनों की जरूरत है।
आरोपी के वकील ने किया CBI की मांग का विरोध
वहीं, आरोपी की ओर से पेश वकील ने CBI की मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि CBI अपने आवेदन में यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि अतिरिक्त हैंडराइटिंग की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि पहले ही आरोपी से लगभग 60 पन्नों पर लिखवाया जा चुका है। इसके बावजूद CBI यह नहीं बता पाई कि वे नमूने तुलना के लिए कैसे अपर्याप्त हैं। वकील ने यह भी दलील दी कि आरोपी एक वरिष्ठ नागरिक है और बार-बार हैंडराइटिंग के नमूने लेने की प्रक्रिया उसे अनावश्यक रूप से परेशान करेगी। उन्होंने कहा कि आरोपी ने जांच में पूरा सहयोग किया है और जांच एजेंसी द्वारा जो भी लिखने के लिए कहा गया, वह सब लिखा। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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