इस वक्त देश भर में सबसे ज्यादा चर्चा चल रही है सोशल मीडिया के ज़रिए फैलाई जा रही अफ़वाहों के ख़तरे की। अफ़वाहें किस तरह पूरे शहर में आग लगा सकती हैं, AI videos के ज़रिए कैसे शहर में दंगे करवाए जा सकते हैं, ये मध्य प्रदेश के उज्जैन और पंजाब के एक यूनिवर्सिटी में देखने को मिला। उज्जैन पुलिस का आरोप है कि पांच social media influencers के ज़रिए Facebook, Instagram पर पूरे शहर में झूठी अफ़वाह फैलाई गई कि शाही मस्जिद को गिराने के लिए बुलडोज़र पहुंच चुके हैं। जबकि ये झूठ था।
ये social media influencers उज्जैन के थे और वो प्रोटेस्ट में भी पहुंच गये। पथराव, आगजनी हुई, लेकिन पुलिस ने स्थिति को फौरन संभाल लिया। हिंसा के वक्त न काजी की अपील काम आई, न पुलिस की दलील, फिर लाठीचार्ज हुआ, टियरगैस चली। अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पूरी दुनिया AI के ख़तरे की बात ही कर रही है लेकिन उज्जैन में तो ये practical देखा गया। मस्जिद के आस-पास AI created bulldozer दिखाकर दंगा फैला दिया गया। जो मस्जिद तोड़ी नहीं गई, उसे टूटा हुआ दिखा दिया गया। ये तो भला हो शहर काजी का जिसने लोगों को सावधान किया। अब पुलिस ये देखेगी कि AI video किसने बनाया। फिर उन लोगों की तलाश करेगी जिन्होंने इसे फैलाया। पुलिस के ज़िम्मे अब ये नया काम आ गया लेकिन AI generated video कितने खतरनाक हैं, ये लोगों को समझ आ गया। आम पब्लिक के लिए असली और नक़ली video में फर्क करना मुश्किल होता है। भावनाएं भड़कने में देर नहीं लगती। इसलिए बहुत सावधान रहने की ज़रूरत है।
LPU में वीडियो: कुछ सच, कुछ फेक, मामला सियासी हुआ
सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके आग लगाने की कोशिश का एक उदाहरण पंजाब की लवली प्रौफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में देखने को मिला। अफवाह के चक्कर में यूनिवर्सिटी में हंगामा हुआ, छात्रों का प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया, तोड़फोड़ और आगजनी हुई, पुलिस की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया।
दरअसल, LPU में दो दिन से छात्र प्रोटेस्ट कर रहे थे। प्रदर्शन से दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक मैसेज चला जिसमें आरोप लगाया गया कि LPU गर्ल्स हॉस्टल में घुसकर एक बाहरी शख्स ने एक छात्रा के साथ रेप किया। ये भी कहा गया कि बाद में रेप की शिकार छात्रा ने ने आत्महत्या कर ली। इस मैसेज से छात्र भड़क गए, प्रोटेस्ट करने लगे। देर रात बड़ी संख्या में कुछ लोग आए और यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ शुरू कर दी। जिन लोगों ने आगजनी, तोडफोड़ की, उन सबने अपने मुंह कपड़े से ढंक रखे थे, उनके पास वॉकी टॉकी भी थे।पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। यूनीवर्सिटी प्रबंधन ने निमित कक्षाओं को दस दिन के लिए स्थगित कर दिया, मिड-टर्म परीक्षाएं टाल दी गई है। डरे हुए छात्र हॉस्टल खाली करके अपने घर जा रहे हैं।
Lovely Professional University में हंगामा क्यों हुआ, इसके कई कारण हैं। मामला उलझा हुआ है। पहली बात, किसी को भी नहीं पता कि क्या वाक़ई rape हुआ या नहीं? क्या university में बाहर से नक़ाबपोश आए और उन्होंने हिंसा की? क्या पुलिस ने hostel की लड़कियों के साथ मारपीट की?
दरअसल, यहां मामला पूरी तरह political है। पंजाब में चुनाव होने वाले हैं। सारे राजनीतिक दल इसमें कूद पड़े हैं। अकाली दल के चीफ सुखबीर बादल ने तो साफ़ कह दिया कि चूंकि Lovely University के संस्थापक अशोक मित्तल ने आम आदमी पार्टी छोड़ी, तो अरविंद केजरीवाल उनसे बदला ले रहे हैं। इसीलिए पंजाब में पुलिस पर भी शक है। यहां भी videos और सोशल मीडिया मैसेजेस की भरमार है। यहां भी ये समझना मुश्किल है कि कौन सा message सच्चा है और कौन सा video genuine है? मज़े की बात ये है कि आम आदमी पार्टी कह रही है कि इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए लेकिन रील बनाने के चक्कर में राजनीति तो दिल्ली में भी हुई, यहां आम आदमी पार्टी बीजेपी से टकराई।
चुनाव आयोग : तुम जीते तो ठीक, तुम हारे तो हेराफेरी?
कांग्रेस के निशाने पर इस वक्त चुनाव आयोग है। कल देश भर में प्रदर्शन के बाद आज कांग्रेस कार्य समिति ने मांग की कि SIR पर फौरन रोक लगाई जाय और जिन 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाये गये हैं, उन्हें वोटर लिस्ट में फिर से शामिल किया जाय। राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपने पद बने रहने का अब कोई अधिकार नहीं है।
कल INDIA ब्लॉक की मीटिंग भी इसी मुद्दे पर होगी, लेकिन अखिलेश यादव नहीं जाएंगे, ममता बनर्जी दिल्ली पहुंच गई। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे रविवार को चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च निकालेंगे, लेकिन INDIA ब्लॉक में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दोनों सदनों में इंडिया ब्लॉक महाभियोग का प्रस्ताव लाएगा।
आज बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर तीखे वार किये, पूछा कि क्या वह हिमाचल, कर्नाटक और केरल के रिज़ल्ट को गैरकानूनी मानती है ? कांग्रेस ने चुनाव आयोग को मुद्दा बनाने के लिए पूरी ताक़त लगाई हुई है, ज्ञानेश कुमार को घेरने की पूरी कोशिश है। ये राहुल गांधी का favourite issue है। कांग्रेस की चुनाव में बार-बार हार क्यों होती है इसका excuse है। अपने समर्थकों को बताने के लिए अच्छा ख़ासा बहाना है। “कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना” है, लेकिन ज्ञानेश कुमार ने परसों पूरे issue की हवा निकाल दी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने अच्छा किया कि उन्होंने जनता की आवाज़ सुनी, जनमत को मान दिया, जिन voters को नोटिस मिले, उनको राहत दी, वोटर के लिए काम आसान किया। BLO अब वोटर के घर जाएंगे, सारे दस्तावेज़ खुद जुटाएंगे, जहां SIR नहीं हो रहे हैं, वहां नए voters के लिए Form-6 से parent declaration हटा दिया। ECInet के review का order भी ठीक है। चुनाव आयोग अब मशीन की तरह काम नहीं करेगा।
ज्ञानेश कुमार ने तीनों चुनाव आयुक्तों की मीटिंग करके आपसी विवाद को ख़त्म किया, तस्वीर भी जारी कर दी और ये confirm कर दिया कि चुनाव आयोग के आपसी मतभेदों में ये कहीं नहीं आया कि चुनाव प्रक्रिया में कोई हेराफेरी हुई, वोटों में कहीं गड़बड़ी हुई।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के internal conflict को ‘वोट चोरी’ का नाम देने की कोशिश की, लेकिन जनता ये तो पूछेगी कि जहां विपक्ष की जीत होती है, वहां चुनाव आयोग सही हो जाता है और जहां हार होती है वहां manipulation दिखाई देता है। ये कैसे हो सकता है?
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 28 सितंबर, 2026 का पूरा एपिसोड







































