तमिलनाडु में सरकार के गठन को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है। शुक्रवार शाम को खबर आई कि टीवीके नेता विजय अगले दिन चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में शपथ लेंगे, लेकिन कुछ ही मिनट बाद खबर आई कि राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है, क्योंकि उनके पास अभी भी बहुमत के लिए जरूरी विधायकों का समर्थन नहीं है।
विजय शुक्रवार को राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मिले थे, लेकिन 116 विधायकों के समर्थन का पत्र ही सौंपा। विजय ने कहा कुछ और पार्टियां उन्हें समर्थन देंगी, लेकिन राज्यपाल ने कहा कि पहले 118 विधायकों के समर्थन का पत्र लेकर आइये। विजय को सिर्फ कांग्रेस और वामपंथी दलों का समर्थन मिला है। विजय की टीवीके के पास 107 विधायक हैं, 5 कांग्रेस और 4 लेफ्ट को मिलाकर 116 विधायक ही बनते हैं। वामपंथी पार्टियों ने कहा है कि वे विजय की सरकार को बाहर से मुद्दों के आधार पर समर्थन देंगी।
अब इस बात की औपचारिक पुष्टि हो गई है कि तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन टूट चुका है। सबसे पहले कांग्रेस ने गठबंधन छोड़ा। कांग्रेस की इस धोखेबाजी से डीएमके नेता MK स्टालिन बेहद नाराज हैं। DMK ने केंद्र में INDIA गठबंधन से अलग होने का एलान कर दिया है। स्टालिन की बहन कनिमोझी ने लोकसभा के स्पीकर को पत्र लिख कर कहा है कि डीएमके के सांसदों को कांग्रेस से अलग बैठाने का इंतजाम करें। चिट्ठी में कनिमोझी ने लिखा कि DMK को INDIA अलायंस के साथ न माना जाए।
स्टालिन इस बात से नाराज है कि उन्होंने बुरे वक्त में कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा, इस बार चुनाव में कांग्रेस ने DMK की मदद से पांच सीटें जीतीं लेकिन चुनाव नतीजे आने के तुरंत बाद राहुल गांधी ने DMK से रिश्ता खत्म करने और TVK का समर्थन करने का ऐलान कर दिया। मेरे पास इस बात की पुष्ट सूचना है कि चुनाव में हार के बाद DMK ने AIADMK की सरकार बनवाने का प्रयास किया था।
स्टालिन ने CPI-CPM और VCK से कहा था कि वो भी AIADMK को बाहर से समर्थन दें, लेकिन वामपंथी पार्टियों को AIADMK के साथ BJP के गठबंधन को लेकर समस्या है। वामपंथी दलों ने विजय को समर्थन देने का फैसला करने से पहले स्टालिन को सूचित किया, इसलिए उनसे नाराजगी कम है। स्टालिन की असली नाराजगी कांग्रेस से है जिसने बिना कोई बात किए उतावला होकर विजय की TVK को समर्थन दे दिया।
DMK के नेताओं को लगता है कि अगर कांग्रेस अचानक DMK का साथ नहीं छोड़ती तो DMK और AIADMK मिलकर विजय को सरकार बनाने से रोक सकते थे। अब स्थिति ये है कि कांग्रेस और लैफ्ट का समर्थन मिलने के बाद भी विजय बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाए हैं, वह राज्यपाल से तीन बार मिल चुके हैं लेकिन उनके पास कुल 116 विधायकों का समर्थन है, बहुमत के लिए दो विधायकों की कमी है।
बदले हालात में अब कुछ भी हो सकता है। VCK के नेताओं की स्टालिन से बातचीत चल रही है। अब अगर DMK और AIADMK साथ आते हैं, तो कांग्रेस मुश्किल में फंसेगी। 1979 में बीजू पटनायक ने उस समय करुणानिधि और MGR के बीच मुलाकात कराई थे और DMK, AIADMK का विलय कराने की कोशिश की थी, लेकिन वह प्रयास सफल नहीं हो पाया। उस समय MGR के कई मंत्री विलय के सख्त खिलाफ थे।
इस बार स्थिति दूसरी है, DMK के 59 और AIADMK के 47 विधायक हैं, जो कि बहुमत के आंकड़े से ज्यादा है। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 08 मई, 2026 का पूरा एपिसोड







































