भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर नया इतिहास रच दिया है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अनिश्चितताओं के बावजूद कंपनी ने रिकॉर्ड राजस्व, रिकॉर्ड EBITDA और रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है। रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में इन आंकड़ों की जानकारी देते हुए कहा कि डिजिटल और रिटेल कारोबार अब कंपनी की ग्रोथ के सबसे बड़े इंजन बन चुके हैं।
₹11.75 लाख करोड़ के पार पहुंचा राजस्व
रिलायंस इंडस्ट्रीज का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹11,75,919 करोड़ पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 9.8 प्रतिशत अधिक है। कंपनी का यह अब तक का सबसे ज्यादा वार्षिक राजस्व है। मुकेश अंबानी ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रहीं, लेकिन कंपनी ने अपने विविध कारोबारों की बदौलत लगातार विकास की रफ्तार बनाए रखी।
EBITDA दोगुने से भी ज्यादा हुआ
कंपनी का EBITDA वित्त वर्ष 2021 के ₹97,580 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹2,07,911 करोड़ पहुंच गया। यानी पांच साल में कंपनी ने अपने EBITDA को दोगुने से भी ज्यादा कर लिया। अंबानी ने बताया कि रिलायंस रिटेल और जियो जैसे डिजिटल कारोबारों ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई। FY26 के कुल EBITDA में इन दोनों व्यवसायों का योगदान लगभग 50 प्रतिशत रहा।
मुनाफे में 18% की शानदार बढ़त
रिलायंस का शुद्ध मुनाफा FY26 में बढ़कर ₹95,754 करोड़ हो गया, जो पिछले साल के मुकाबले 17.8 प्रतिशत अधिक है। कंपनी का कहना है कि बेहतर परिचालन क्षमता, मजबूत कैश फ्लो और रणनीतिक निवेशों ने मुनाफे को नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
निवेश और राष्ट्र निर्माण में सबसे आगे
मुकेश अंबानी ने कहा कि रिलायंस भारत के विकास में सबसे बड़े निवेशकों में शामिल है। FY26 में कंपनी का पूंजीगत खर्च ₹1,44,271 करोड़ रहा। वहीं पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने कुल ₹6.48 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। रिलायंस ने FY26 में ₹2,78,808 करोड़ का निर्यात किया, जो भारत के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट का लगभग 6.7 प्रतिशत है। इसके अलावा कंपनी ने सरकार के खजाने में ₹2,16,472 करोड़ का योगदान दिया।
भविष्य की ग्रोथ का नया फॉर्मूला
मुकेश अंबानी का मानना है कि अब रिलायंस की भविष्य की वृद्धि मुख्य रूप से डिजिटल सेवाओं, रिटेल, नई तकनीकों और उपभोक्ता आधारित कारोबारों से आएगी। मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर क्रेडिट रेटिंग और लगातार बढ़ती नकदी कंपनी को आने वाले वर्षों में और मजबूत बनाएगी।
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