अगर आपके पास किसी अनजान नंबर से या किसी परिचित के नंबर से कोई टेक्स्ट मैसेज आए, व्हाटसैप मैसेज आए, उसमें आपके फोन का, बिजली का या फिर गैस कनेक्शन कटने की बात कही गई हो, ये कहकर डराया गया हो कि गाड़ी का चालान हो गया है, तो आप ऐसे मैसेज पर कतई क्लिक न करें। इस मैसेज को तुरंत डिलीट कर दें। क्योंकि अगर आपने इसे क्लिक कर दिया तो आपका फोन हैक होगा और मिनटों में ही आपका अकाउंट खाली हो जाएगा। आज मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद में इसी तरह के साइबर फ्रॉड करने वाले कई गिरोह पकड़े गए हैं। अब तक की जांच में पता लगा है कि इस गिरोह ने देश भर में कम से कम 50 करोड़ की ठगी की है। हजारों लोगों को चूना लगाया है, मुंबई पुलिस ने 6 लोगों को अरेस्ट किया है। ये लोग APK फाइल भेज कर लोगों के फोन हैक करते थे, इसके बाद उनके अकाउंट से पैसा उड़ा देते थे।
मामला तब सामने आया जब एक शख्स पुलिस के पास पहुंचा। उसने बताया कि उसके फोन पर मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि बिल जमा न होने के कारण आपका गैस कनैक्शन कटने वाला है। लेटेस्ट बिल चेक करके कम से कम 10 रूपए PAY कर दो, तो गैस कनैक्शन नहीं कटेगा। इस मैसेज के साथ एक फाइल अटैच थी। इस शख्स ने फाइल पर क्लिक किया और अपने अकाउंट से 10 रूपए का पेमेंट कर दिया। इसके कुछ ही मिनटों के बाद उसके अकाउंट से दो लाख 35 हजार रुपए निकल गए। शख्स ने जब बैंक से संपर्क किया, तो कोई मदद नहीं मिली। फिर ये शख्स पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने जांच की तो इसके तार दिल्ली, झारखंड और बिहार तक फैले थे। मुंबई पुलिस की टीमें तीनों राज्यों में गईं और कुल 6 लोगों को पकड़ा।
दिल्ली पुलिस को 7 महीने लगे
हैरानी की बात ये है कि इसी तरह के एक गिरोह को दिल्ली पुलिस ने भी पकड़ा है। दिल्ली पुलिस को साइबर क्रिमिनल्स तक पहुंचने में करीब 7 महीने लग गए। पुलिस ने इस मामले की जांच नवंबर 2025 में शुरू की थी। यहां भी मामला मुंबई जैसा ही था। एक व्यक्ति ने शिकायत की थी कि उसके फोन पर गैस कनेक्शन कटने का मैसेज आया। इसके अटैचमेंट में नोटिस था। जैसे ही उसने इस फाइल को ओपन किया, वैसे ही उसका फोन हैक हो गया। उसके अकाउंट के 2 लाख 64 हजार रूपए गायब हो गए। इस केस की जांच दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को सौंपी गई। पुलिस ने उन अकाउंट्स की छानबीन की, जिन अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर किए गए थे। जिन ATMs से पैसा निकाला गया था, उसकी सीसीटीवी फुटेज चेक की गई। सात महीने की मेहनत के बाद साइबर सेल ने इन साइबर डकैतों को गिरफ्तार कर लिया।
अहमदाबाद पुलिस ने 3 को पकड़ा
दूसरी तरफ अहमदाबाद पुलिस ने उस गिरोह को पकड़ लिया, जो APK फाइल्स जनरेट करता था। फिर ये फाइल्स साइबर क्रिमनिल्स को बेचता था। जिनके जरिए साइबर ठग लोगों के बैंक अकाउंट खाली कर रहे थे। अहमदाबाद पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा है जो झारखंड के रहने वाले हैं। तीनों का कनेक्शन साइबर क्राइम के लिए बदनाम झारखंड के जामताड़ा से है। पुलिस का दावा है कि इन लोगों ने APK फाइल्स जनरेट करने का पूरा सिस्टम बना रखा था। ये साइबर क्रिमिनल, पहले APK फाइल डेवेलप करते थे, फिर टेलीग्राम पर एक BOT के जरिए इस फाइल को दूसरे क्रिमिनल्स को 12 हजार रूपए में बेचते थे। इस काले धंधे से ये लोग पिछले कुछ महीनों में 70 लाख रुपए कमा चुके थे।
इस गिरोह तक भी अहमदाबाद पुलिस एक शख्स की शिकायत के जरिए पहुंची। शिकायत करने वाले के साथ भी ठगी हुई थी। उसे भी गैस कनेक्शन कटने का मैसेज मिला था। उसने मैसेज को क्लिक किया और लुट गया। इस व्यक्ति ने पुलिस को ठगी की शिकायत की। जांच के बाद पुलिस ने झारखंड से तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का सरगना, गिरिडीह का रहने वाला पूर्णानंद तिवारी है, जिसे कोलकाता से बिहार जाते वक़्त ट्रेन से गिरफ्तार किया गया। अहमदाबाद पुलिस के मुताबिक पूर्णानंद तिवारी की गिरफ्तारी एक बड़ी कामयाबी है। इससे APK फाइल की मदद से फ्रॉड करने वालों पर लगाम लगेगी।
क्या होती है APK फाइल?
दरअसल, APK का फुल फॉर्म Android Package Kit होता है। जब भी आप गूगल के प्ले स्टोर से कोई ऐप डाउनलोड करते हैं, तो उस ऐप को चलाने के लिए जितनी जरूरी इलेक्ट्रॉनिक इन्फॉर्मेशन होती है, वो APK फाइल में ही दर्ज होती है। इसको ऐप प्रोग्राम इंस्ट्रक्शन कहते हैं। जब आप गूगल के प्ले स्टोर से कोई ऐप या APK फाइल डाउनलोड करते हैं, तो वो पूरी तरह से सेफ होती है, क्योंकि गूगल उसकी authentication करके ही प्ले स्टोर पर डालता है। हालांकि, आजकल साइबर क्रिमिनल्स बैंक, गैस एजेंसी, RTO जैसे प्रमाणिक सोर्स के नाम पर ऐसी नकली APK फाइल्स डेवेलप कर लेते हैं और इसे लोगों के फोन पर भेजते हैं। जैसे ही कोई इस फाइल को ओपन करता है तो उसके फोन का सारा कन्ट्रोल हैकर के पास पहुंच जाता है। यहां तक कि बैंक के OTP और पासवर्ड भी उनके पास पहुंच जाते हैं और वो लोगों के अकाउंट आसानी से खाली कर देते हैं।
दूसरी बड़ी बात ये है कि आपके फोन में जितने भी लोगों के फोन नंबर सेव होते हैं, साइबर क्रिमिनल्स उन सबको आपके फोन नंबर से वही मैसेज भेजे देते हैं, जो आपको भेजा गया था। अगर उनमें से किसी ने इसे क्लिक किया तो वो भी ठगी का शिकार हो जाता है। अहमदाबाद पुलिस ने जिन साइबर क्रिमिनल्स को पकड़ा है, उनके पास से भी सरकारी और प्राइवेट बैंक्स के नाम की APK फाइल्स मिली हैं। उनके पास कई गैस एजेंसीज और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के चालान के नाम की APK फाइल्स भी मिली हैं। इन्हीं की मदद से ये अपराधी, लोगों के मोबाइल को अपने कंट्रोल में ले लेते थे, उनके व्हाट्सऐप से भी ये अपराधी APK फाइल्स भेजकर दूसरों को ठगने की कोशिश कर रहे थे।
गृह मंत्रालय ने किया अलर्ट
गृह मंत्रालय ने बड़ी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा है। साइबर ठगों से बचने के लिए कभी भी अंजान नंबरों से भेजे गए लिंक को ओपन न करें। पैसे ट्रांसफर करने की किसी भी रिक्वेस्ट पर यकीन ना करें। साइबर फ्रॉड को लेकर CBI ने 16 राज्यों में 80 लोकेशन पर क्रैकडाउन करके उन लोगों को पकड़ा है, जो डिजिटल स्कैम के किंग पिन थे।
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