कुमार मंगलम बिड़ला ने कर्ज में डूबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया की कमान एक बार फिर संभाल ली है। कंपनी ने उन्हें नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया है, जो 5 मई 2026 से प्रभावी हो गया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, उन्होंने रविंदर टक्कर की जगह ली है। टक्कर ने चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन अब वह नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन के रूप में जुड़े रहेंगे और कंपनी के ट्रांजिशन में सहयोग करेंगे।
कंपनी के लिए बड़ी चुनौती
वोडाफोन आइडिया लंबे समय से वित्तीय दबाव से जूझ रही है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के AGR (समायोजित सकल राजस्व) फैसले के बाद कंपनी पर भारी बकाया का बोझ आ गया था, जिसमें करीब ₹53,000 करोड़ की देनदारी ने उसकी वित्तीय स्थिति को और कमजोर कर दिया। टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा भी कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो द्वारा सस्ते डेटा और मुफ्त कॉलिंग ऑफर ने वोडाफोन आइडिया के बिजनेस पर गहरा असर डाला।
हालांकि, सरकार की ओर से कुछ राहत जरूर मिली है। AGR बकाया का पुनर्मूल्यांकन कर इसे करीब 27% घटाकर ₹64,046 करोड़ किया गया, जो पहले ₹87,695 करोड़ था। इसके बावजूद, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह राहत उम्मीद से कम है। आईआईएफएल कैपिटल के मुताबिक, अगर ब्याज और पेनल्टी में छूट मिलती तो राहत कहीं ज्यादा हो सकती थी।
कंपनी को देनी होगी किस्त
भुगतान संरचना के तहत, कंपनी को AGR बकाया 10 वर्षों में चुकाना होगा। FY2031-32 से FY2034-35 तक हर साल न्यूनतम ₹100 करोड़ और FY2035-36 से FY2040-41 तक हर साल ₹10,608 करोड़ की किस्त देनी होगी। इसके अलावा FY2018 और FY2019 से जुड़े बकाया के लिए मार्च 2026 से मार्च 2031 तक हर साल ₹124 करोड़ अलग से चुकाना होगा। विश्लेषकों के अनुसार, स्पेक्ट्रम बकाया भी कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। BofA ग्लोबल रिसर्च का अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में Vi को करीब ₹49,000 करोड़ का भुगतान करना होगा, जिसमें देनदारी तेजी से बढ़ती जाएगी।
सरकारी राहत के बावजूद कंपनी की वित्तीय स्थिति अभी भी कमजोर बनी हुई है। दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में वोडाफोन आइडिया को ₹17,418 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि इसकी नेटवर्थ घटकर माइनस ₹87,744 करोड़ पर पहुंच गई है।






































