
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) के बाद अब बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने भी दिवालिया हो चुकी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के लोन खाते को धोखाधड़ी यानी फ्रॉड करार दिया है। बैंक ने कंपनी के पूर्व निदेशक और उद्योगपति अनिल अंबानी को भी इस मामले में शामिल किया है। यह खुलासा कंपनी द्वारा रेगुलेटरी फाइलिंग में किया गया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, बैंक का ₹2,462 करोड़ का लोन है और ₹1,656 करोड़ अब भी बकाया है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने रिलायंस कम्युनिकेशंस को दो चरणों में कुल ₹2,462.50 करोड़ का लोन और क्रेडिट लाइन प्रदान की थी। पहला लोन ₹1,600 करोड़ और दूसरा लोन ₹862.50 करोड़।
बैंक ऑफ बड़ौदा का बकाया है इतना कर्ज
बैंक के मुताबिक, 28 अगस्त 2025 तक कंपनी पर कुल ₹1,656.07 करोड़ की राशि बकाया है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने यह भी स्पष्ट किया कि आरकॉम का खाता 5 जून 2017 से ही ‘नॉन-परफॉर्मिंग एसेट’ (एनपीए) घोषित किया जा चुका है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने पत्र में बताया कि इस खाते को फ्रॉड घोषित करने का फैसला एक फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। बैंक का कहना है कि यह निर्णय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप लिया गया है। फिलहाल कंपनी कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ॉल्यूशन प्रक्रिया (सीआईआरपी) के अधीन है, लेकिन बैंक ने कहा कि अभी तक एनसीएलटी द्वारा कोई सक्रिय रेजॉल्यूशन प्लान मंज़ूर नहीं किया गया है।
अनिल अंबानी का बचाव
अनिल अंबानी के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में बैंक ऑफ बड़ौदा की कार्रवाई को 12 साल पुराने मामलों से जुड़ा बताया गया है। बयान में कहा गया कि अनिल अंबानी 2006 से 2019 तक रिलायंस कम्युनिकेशंस के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में रहे। वह कभी भी कंपनी के कार्यकारी पद पर नहीं रहे और ना ही रोजमर्रा के संचालन में उनकी कोई भूमिका थी। बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि आरकॉम पर कुल 14 बैंकों का कंसोर्टियम था, लेकिन कुछ चुनिंदा बैंक अब “चुनिंदा और टुकड़ों में कार्रवाई” कर रहे हैं और सिर्फ अंबानी को निशाना बना रहे हैं।
मामला अब भी कोर्ट में लंबित
रिलायंस कम्युनिकेशंस की दिवाला प्रक्रिया के तहत, कंपनी की निगरानी एसबीआई के नेतृत्व वाली लेनदारों की समिति और एक रेजॉल्यूशन प्रोफेशनल कर रहे हैं। मार्च 2020 में इस समिति ने एक रेजॉल्यूशन प्लान को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी, लेकिन मामला अभी तक NCLT, सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायिक मंचों पर लंबित है। बैंकिंग नियमों के अनुसार, जब किसी खाते को फ्रॉड घोषित किया जाता है, तो संबंधित मामला जांच एजेंसियों को सौंपना अनिवार्य हो जाता है। साथ ही, उधारकर्ता को पांच वर्षों तक किसी भी नए बैंक कर्ज या वित्तीय सेवा से वंचित किया जा सकता है।
कंपनी पर ₹40,400 करोड़ का कुल कर्ज
पीटीआई की खबर के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस ने अप्रैल में जानकारी दी थी कि मार्च 2025 तक उस पर कुल ₹40,400 करोड़ का कर्ज है। लोन भुगतान में विफल रहने के चलते कंपनी को दिवाला और ऋण शोधन प्रक्रिया के तहत एनसीएलटी में भेजा गया था।






































