साल 2016 में जियो 14वें ऑपरेटर के तौर पर भारतीय टेलीकॉम मार्केट में उतरा था। उस समय ये एक बहुत ही स्थापित इंडस्ट्री थी, जहां मोबाइल डेटा महंगा था और सीमित मात्रा में उपलब्ध था। इंडस्ट्री के मौजूदा बिजनेस मॉडल को अपनाने के बजाय, जियो ने एक ऐसी रणनीति अपनाई जो टेक्नोलॉजी पर आधारित थी और जिसका मुख्य उद्देश्य किफायती कनेक्टिविटी देना था।
डिजिटल कनेक्टिविटी को सस्ता और सबकी पहुंच में लाने के विजन के साथ, जियो ने फ्री वॉइस कॉल और कीमतों में भारी कटौती करके पूरी इंडस्ट्री के आर्थिक ढांचे को ही बदल दिया। आकाश अंबानी के अनुसार, लॉन्च के समय डेटा की कीमत लगभग 228 रुपये प्रति GB थी, जो आज घटकर लगभग 4.90 रुपये प्रति GB रह गई है। वहीं, एक ग्राहक का औसत मासिक डेटा इस्तेमाल 43.7 GB तक पहुंच गया है।
“भारत पीछे क्यों रहे?”
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईशा अंबानी ने बताया कि कैसे उन्होंने और उनके भाई आकाश ने इस बात पर गहरी चर्चा की थी कि भारत को डिजिटल क्षेत्र में पीछे क्यों नहीं रहना चाहिए। “भारत पीछे क्यों रहे?” उन्होंने कहा कि इसका जवाब था- शुरुआत से एक डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी बनाना। इसी विजन ने जियो की मार्केट में एंट्री और उसके दीर्घकालिक लक्ष्यों को आकार दिया।
मार्केट लीडर बन गया है जियो
समय के साथ, जियो मार्केट लीडर बन गया है। इसने मार्केट को 14 ऑपरेटरों से समेटकर 4 प्रमुख कंपनियों तक सीमित कर दिया है। 30 जून 2026 तक, जियो के पास 533.3 मिलियन ग्राहक थे, जिनमें 284.9 मिलियन 5G सब्सक्राइबर शामिल हैं। कंपनी के पास भारत के वायरलेस ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर मार्केट का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है और देश के कुल वायरलेस डेटा ट्रैफिक का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा जियो के नेटवर्क से होकर गुजरता है।
सिर्फ मोबाइल कनेक्टिविटी तक ही सीमित नहीं है जियो की सफलता
जियो की सफलता सिर्फ मोबाइल कनेक्टिविटी तक ही सीमित नहीं है। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के क्षेत्र में, वित्त वर्ष 2026 में जियो के पास 27.1 मिलियन ग्राहक थे और इसका मार्केट शेयर 42.60 प्रतिशत था, जबकि भारती एयरटेल का मार्केट शेयर 22.71 प्रतिशत था। 5G और UBR-आधारित फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी 77.49 प्रतिशत रही, जो ये दिखाती है कि इसकी तकनीक और काम करने के तरीके ने इसे होम ब्रॉडबैंड के क्षेत्र में एक मजबूत स्थिति बनाने में कैसे मदद की है।
जियो ने तैयार किया अपना खुद का टेक्नोलॉजी स्टैक
खुद को एक पारंपरिक टेलीकॉम ऑपरेटर के बजाय एक ‘एंड-टू-एंड’ टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में स्थापित करते हुए, जियो ने अपना खुद का टेक्नोलॉजी स्टैक तैयार किया है, जिसमें 4G/5G कोर, नेटवर्क सॉफ्टवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम और डिजिटल एप्लिकेशन शामिल हैं। 30 जून 2026 तक, कंपनी ने 4G, 5G, 6G, क्लाउड-नेटिव नेटवर्क और AI-आधारित ऑटोमेशन के क्षेत्रों में 7220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए थे।
भविष्य की ओर देखते हुए, जियो की योजना अपनी इस साबित हो चुकी तकनीकी क्षमता का वैश्विक स्तर पर लाभ उठाने की है, जिसके लिए वो अंतरराष्ट्रीय टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ ‘मैनेज्ड-सर्विसेज प्रोवाइडर’ के रूप में साझेदारी करेगी। जियो के लिए अगला मौका भारत से बाहर भी है। दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण बाजारों में से एक में बड़े पैमाने पर परखी गई इसकी इन-हाउस टेक्नोलॉजी को विकसित और विकासशील देशों के टेलीकॉम ऑपरेटरों को पेश किया जा सकता है।
आकाश अंबानी ने इस रणनीति को सिर्फ हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर बेचने के बजाय, ऑपरेटरों के साथ ‘एंड-टू-एंड मैनेज्ड-सर्विसेज प्रोवाइडर’ के रूप में साझेदारी करने के रूप में समझाया। उन्होंने कहा कि कंपनी को “विकसित और विकासशील देशों सहित पूरी दुनिया में एक बहुत बड़ा बाजार अवसर” दिखाई देता है। इस तरह की साझेदारियां भारतीय तकनीक को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाकर कमाई के नए स्रोत खोल सकती हैं।
21 अक्टूबर को खुलेगा जियो का आईपीओ
ऑफरिंग के विवरण के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO बुधवार, 21 अक्टूबर को पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा, जिसमें कंपनी लगभग 108 अरब अमेरिकी डॉलर की वैल्यूएशन हासिल करने का लक्ष्य रख रही है। सब्सक्रिप्शन 23 अक्टूबर को बंद होगा।
जियो प्लेटफॉर्म्स अपने IPO के जरिए लगभग 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है और इस ऑफरिंग में 27 करोड़ तक नए शेयर शामिल होंगे।
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