केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह आज गुजरात के साबरमती से देश की पहली LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया। अहमदाबाद रेल डिवीजन ने बताया कि भारतीय रेल पहली बार ट्रेन की ड्राइविंग पावर कारों (DPCs) में LNG आधारित फ्यूल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। नई डुअल-फ्यूल टेक्नोलॉजी एक ही इंजन को LNG और डीजल दोनों पर चलाने की सुविधा देती है, जो ईंधन की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
2000 किमी से ज्यादा का किया जा चुका है ट्रायल
रेलवे के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत, भारतीय रेल ने 1400 HP की क्षमता वाली दो ड्राइविंग पावर कारों को LNG-डीजल डुअल-फ्यूल सिस्टम में कन्वर्ट किया है। कन्वर्ट की गई दोनों DPCs पर 2000 किमी से ज्यादा का फील्ड ट्रायल भी किया जा चुका है। इस नई टेक्नोलॉजी के माध्यम से LNG का इस्तेमाल कर डीजल की लगभग 40 प्रतिशत तक खपत कम की जा सकेगी। LNG से चलने वाली इस ट्रेन को चेन्नई स्थित ICF ने तैयार किया है।
LNG और डीजल दोनों फ्यूल पर चल सकती है ट्रेन
ये नई ट्रेन पूरी तरह से LNG पर निर्भर नहीं रहेगी। इसका इंजन LNG और डीजल दोनों फ्यूल पर चल सकता है, जिससे ये एक डुअल-फ्यूल सिस्टम बन जाता है। फ्यूल की उपलब्धता के आधार पर, इंजन LNG और डीजल के बीच स्विच कर सकता है। इसका मतलब ये भी है कि LNG उपलब्ध न होने पर भी ट्रेन का संचालन जारी रह सकता है।
सीएनजी कार के उदाहरण से समझें पूरी टेक्नोलॉजी
इसे आसाना भाषा में समझने के लिए एक सीएनजी कार का उदारहण लिया जा सकता है। जिस तरह एक सीएनजी कार, सीएनजी के साथ-साथ पेट्रोल से भी चल सकती है। इसके अलावा, कार को कभी भी सीएनजी से पेट्रोल में या पेट्रोल से सीएनजी में स्विच किया जा सकता है। ठीक इसी तरह, इस ट्रेन को भी डीजल से एलएनजी में या एलएनजी से डीजल में स्विच किया जा सकता है।
कम होगी डीजल की खपत
इस नई टेक्नोलॉजी की मदद से न सिर्फ डीजल की खपत कम होगी बल्कि पर्यावरण को भी साफ-सुथरा रखने में मदद मिलेगी। ये टेक्नोलॉजी कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) जैसे प्रदूषकों को कम करने में मदद करेगी।
हर साल होगी अच्छी बचत
LNG के इस्तेमाल से ईंधन का खर्च भी कम होगा। दरअसल, डीजल की तुलना में LNG सस्ता होता है। भारतीय रेलवे का अनुमान है कि एक DPC से हर साल लगभग 11.9 लाख रुपये की बचत करने में मदद कर सकता है। इस हिसाब से, 8 डिब्बे वाली एक ट्रेन हर साल लगभग 23.9 लाख रुपये बचाने में मदद कर सकती है।
टैंक फुल होने पर कितने किमी चलेगी ट्रेन
भारतीय रेल ने प्रत्येक DPC में लगभग 2200 लीटर की क्षमता वाला LNG टैंक फिट किया है। इस टैंक में 950 से 1000 किलोग्राम LNG भरा जा सकता है। इतनी गैस के साथ एक ट्रेन 440 किलोमीटर के आसपास तक सफर कर सकती है। LNG डुअल-फ्यूल सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जो डीजल इंजन जैसी पावर, भरोसा और प्रदर्शन को बनाए रखने में सक्षम है।
भाप से शुरू हुआ भारतीय रेल का सफर एलएनजी तक पहुंचा
बताते चलें कि इससे पहले भारतीय रेल ने 17 जुलाई, 2026 को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन किया था। इस मौके पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इससे पहले भी पहले, साल 2015 में भारतीय रेल ने सीएनजी से चलने वाली ट्रेन चलाई थी। बताते चलें कि भारत में भाप (कोयला और लकड़ी के इस्तेमाल से), डीजल, बिजली, सीएनजी, हाइड्रोजन के बाद अब एलएनजी से भी ट्रेन चलने जा रही है।
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