‘रमीकल्चर ऐप’ मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। ED के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने ‘रमीकल्चर ऐप’ और अन्य से जुड़े केस में, PMLA के तहत लगभग 442.35 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। अटैच की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा राशि, कमर्शियल दुकानें, एक विला और कई रिहायशी अचल संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां M/s. गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों के फैमिली के मेंबर्स, प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट और उनसे जुड़ी कई संस्थाओं के नाम पर थीं।
मई और जून में ED ने की थी छापेमारी
बात दें कि ED ने PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की है। यह पड़ताल तेलंगाना राज्य में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तरफ से दर्ज कई FIR के आधार पर की जा रही है। इन FIR में BNS, 2023 के तहत धोखाधड़ी के अपराधों का आरोप है, जो PMLA के तहत सूचीबद्ध अपराध हैं। इससे पहले, ED ने PMLA, 2002 की धारा 17 के तहत Gameskraft Technologies Pvt. Ltd. के दफ्तर और उसके डायरेक्टरों व मुख्य कर्मचारियों के घरों पर 7 मई 2026 से 14 मई 2026 और 20 जून 2026 से 21 जून 2026 के बीच तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की थी। इन छापेमारियों में कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए, जो जांच के दौरान महत्वपूर्ण सबूत साबित हुए हैं। मई में ही गेम्जक्राफ्ट के 3 संस्थापकों को ED ने अरेस्ट किया था।
इन ब्रांड्स के जरिए चल रहे थे ऑनलाइन रम्मी गेम और टूर्नामेंट
अब तक की पड़ताल से पता चला है कि Gameskraft Technologies Pvt. Ltd. और RummyTime Technologies Pvt. Ltd. मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए ऑनलाइन ‘रियल मनी गेम्स’ खासकर ऑनलाइन रम्मी गेम और टूर्नामेंट चला रही थीं। ये गेम RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime जैसे कई ब्रांड के जरिए चलाए जा रहे थे।
देश भर में जुटा लिए थे 3 करोड़ यूजर
इन प्लेटफॉर्म्स के देश भर में लगभग 3 करोड़ यूजर थे। जांच में यह भी पता चला कि बड़ी संख्या में यूजर उन राज्यों से थे जहां ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग पर प्रतिबंध है, जैसे- तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु। इन कंपनियों ने यूजर्स की तरफ से जमा की गई दांव की रकम पर 10 से 15 प्रतिशत तक प्लेटफॉर्म कमीशन लेकर भारी कमाई की है।
बॉट्स का इस्तेमाल कर भोले-भाले यूजर्स को ठगा
इसके अलावा, जांच से पता चला है कि गेमिंग प्लेटफॉर्म के पारदर्शी, निष्पक्ष और ऑटोमेटेड प्लेयर्स यानी बॉट्स से मुक्त होने का विश्वास दिलाने के बावजूद, इन कंपनियों ने भोले-भाले यूजर्स की जानकारी या सहमति के बिना उनके खिलाफ बॉट्स (ऑटोमेटेड प्रोग्राम/एल्गोरिदम) का प्रयोग किया है। बॉट्स के इस्तेमाल से यूजर्स को पैसे का भारी नुकसान हुआ है, जबकि कंपनियों को इससे गैर-कानूनी कमाई हुई है।
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