दिल्ली में जो दिल दहलाने वाला हादसा हुआ, वह लालच, लापरवाही और रिश्वतखोरी का साफ नतीजा है। मालवीय नगर के पास हौजरानी में एक बेड एंड ब्रेकफास्ट होटल में भयानक आग लगी, 21 लोगों की मौत हुई और 40 से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो गये। मरने वालों में 11 विदेशी नागरिक थे। फ्लरिश स्टे नाम के इस होटल के मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया गया। पता चला जब होटल में आग लगी हुई थी, पड़ोसी आग में फंसे लोगों को बचाने में लगे हुए थे, उस वक्त होटल मालिक अपनी कार में बैठा वहां से गुजरा लेकिन डर के कारण वह रुका नहीं। होटल का मैनेजर फरार है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अस्पताल जाकर घायलों से मिली, मरने वालों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की सहायता देने का ऐलान हुआ है। गंभीर रूप से घायलों को 5-5 लाख रुपये दिए जाएंगे। आग लगने से बिजली कट गई, मेन गेट लॉक हो गया, लोग बाहर नहीं निकल सके, लोगों ने खिड़कियों से निकलने की कोशिश की लेकिन ग्लास की विंडो सील थी। लोगों ने किसी तरह खिड़कियां तोड़ीं, लोग दूसरी और तीसरी मंजिल से कूदे, एक मां अपने बेटे को सीने से चिपकाए तीसरी मंजिल से कूदी। इस हादसे के वक्त आसपास के लोगों ने देवदूत की तरह काम किया। जो कुछ मिला, जैसा समझ में आया, फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश की। पास में गद्दे की दुकान थी, दुकानदार ने सारे गद्दे गली में बिछा दिए ताकि ऊपर से लोग कूद सकें।
जिन परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूटा है, उनकी कहानी रोंगटे खड़े करने वाली हैं। दिल्ली के मंत्री आशीष सूद ने कहा, जिन लोगों ने लापरवाही की, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, पूरी घटना की मजिस्ट्रेट से जांच करायी जाएगी। सच्चाई ये है कि इस मामले की जांच की जरूरत नहीं हैं क्योंकि हकीकत तो इलाके के हर व्यक्ति को मालूम है। फ्लरिश स्टे होटल के मालिक लवकेश बजाज के परिवार के इस इलाके में ऐसे सात होटल और गेस्ट हाउस हैं लेकिन इन लोगों के पास होटल चलाने का कोई लाइसेंस नहीं है, फायर सर्विस की NOC नहीं है, सेफ्टी के किसी नियम का पालन नहीं किया गया।
अब सवाल ये है कि जब कुछ नहीं है तो बिना लाइसेंस के होटल कैसे चल रहे हैं। इस सवाल का जवाब ये है कि इस इलाके में इस तरह के जितने भी होटल चल रहे हैं, उन्होंने दिल्ली सरकार से होम स्टे का लाइसेंस ले रखा है। फ्लरिश स्टे होटल के मालिक को 6 कमरों का होम स्टे चलाने की परमिशन थी लेकिन उसने इसे पांच मंजिला, 25 कमरों वाला होटल बना दिया। बेसमेंट में भी दो कमरे बना दिए और ऊपर की मंजिलों पर पांच-पांच रूम तैयार कर दिए। घनी आबादी और संकरी गलियों वाले इस इलाके में बहुत से घर ऐसे हैं जो होटल में तब्दील हो चुके हैं। और सब के सब इसी तरह मौत के कुएं हैं।
लालच, लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण गैरकानूनी तरीके से इमारतें बन गई, Municipal Commissioner को पता नहीं चला, गेस्ट हाउस चलने लगा, इंसपेक्शन कमेटी को पता नहीं चला। कागज़ पर दिखाए 5 कमरे और बना दिए 25 कमरे। इस पर किसी का ध्यान नहीं गया। न आग से सुरक्षा का कोई इंतजाम, न खिड़कियां, न Ventilation। मौत का कुआं तैयार हो गया लेकिन fire department ने Audit नहीं किया। गैरकानूनी guesthouses में विदेशी नागरिक रहते थे तो भी पुलिस ने कभी चैक नहीं किया। आज आसपास के सारे guest house और hotel वाले अपनी-अपनी प्रापर्टी के शटर गिराकर भाग गए।
इसका मतलब साफ है, गड़बड़ी सब ने की है और इसमें अफसरों की मिलीभगत है। जिन 21 लोगों की जान चली गई वो तो वापस नहीं आएंगे लेकिन जिस-जिस अफसर ने आंख बंद रखने के लिए मोटा माल खाया, उनका पूरा हिसाब होना चाहिए। अगर अब भी एक्शन नहीं हुआ तो फिर ऐसा हादसा दोबारा होने से कोई नहीं रोक पाएगा।
क्या ममता का हाल उद्धव ठाकरे जैसा होगा?
ममता बनर्जी को बहुत बड़ा शॉक लगा। 28 साल से वो जिस पार्टी की सर्वेसर्वा थीं, वो तृणमूल कांग्रेस उनके हाथ से ऐसे निकल गई जैसे मुठ्ठी से रेत फिसलती है। जो 80 विधायक ममता के नाम और पैसे पर जीते थे उनमें से साठ ने अपनी दीदी के खिलाफ बगावत कर दी। ममता बनर्जी ने जिस विधायक को दो दिन पहले पार्टी से निकाला था, उसी विधायक को तृणमूल कांग्रेस के दो तिहाई से ज्यादा विधायकों ने अपना नेता मान लिया। ऋतब्रत बनर्जी ने स्पीकर को विधायकों के समर्थन की चिट्ठी दी और स्पीकर ने ऋतब्रत को विधानसभा में नेता विपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पार्टी नहीं टूटी है, वही असली तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं।
ऋतब्रत के साथ आज वो विधायक भी दिखाई दिए, जो ममता बनर्जी के खासमखास थे। आज सब ने कहा कि उन्हें ममता बनर्जी से कोई शिकायत नहीं है लेकिन वो ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी को किसी कीमत पर नेता नहीं मानेंगे क्योंकि चुनाव में पार्टी की दुर्गति अभिषेक की वजह से ही हुई। अब सवाल ये है कि ममता क्या करेंगी? बागी गुट ने उन्हें मार्गदर्शक क्यों कहा? क्या पार्टी को बचाने के लिए ममता अपने भतीजे को हाशिये पर डालेंगी? क्या तृणमूल कांग्रेस का औपचारिक विभाजन हो जाएगा? पार्टी का नाम और चुनाव निशान किसके पास जाएगा? क्या ममता का वही हाल होगा जो उद्धव ठाकरे की शिवसेना का हुआ?
बंगाल में नगर निगमों के अध्यक्षों, नगर परिषदों और पंचायतों के नेताओं ने भी तृणमूल कांग्रेस से किनारा कर लिया है। सौ से ज्यादा पार्षद पार्टी छोड़ चुके हैं। कुछ जगहों पर नेताओं ने पार्टी का दफ्तर बीजेपी को दे दिया, कुछ नेताओं ने कटमनी वापस करना शुरू कर दिया है, तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों पर ताले लग गए हैं। ये सब पार्टी में टूट के संकेत हैं। इसीलिए मैंने कहा कि क्या ममता का हाल भी उद्धव ठाकरे जैसा होगा।
बांग्लादेशी घुसपैठियों के एजेंट्स को भी पकड़ो
गुजरात पुलिस ने ऑपरेशन डेल्टा हंट के तहत अहमदाबाद, अलावा, सूरत, राजकोट, वडोदरा, भरूच और नवसारी समेत कई शहरों में रात भर अभियान चलाया। चौबीस घंटे में 700 से ज़्यादा लोग हिरासत में लिए गए। इनमें से 200 से ज़्यादा घुसपैठियों की पहचान कन्फर्म हो गई। पकड़े गए लोगों ने माना कि वो बांग्लादेशी हैं। इन लोगों के पास बांग्लादेश के पहचान पत्र भी मिले हैं। बाकी लोगों के बारे में जांच पड़ताल की जा रही है। गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी ने बताया कि पूरे गुजरात में 6 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जांच की जा रही है। 362 बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान हो गई है। हर्ष सांघवी ने कहा कि घुसपैठियों को तो वापस भेजा जाएगा लेकिन उन लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी, जिन्होंने घुसपैठियों को पनाह दी।
सवाल ये है कि गुजरात में जो बांग्लादेशी पकड़े गए हैं, वो कहां से आए? कैसे आए? इस बात के सबूत हैं कि ये सब पश्चिम बंगाल के रास्ते से आए थे, ममता बनर्जी की सरकार थी, बंगाल में आधार कार्ड बनाना, पासपोर्ट और पैन कार्ड हासिल करना आसान था। बांग्लादेश से आने वाले ये लोग माफिया के जरिये आते हैं, दलालों को अच्छी खासी रकम देते हैं। ये एजेंट्स document बनवाते हैं और घुसपैठियों को देश भर में पहुंचाते हैं, हर काम के लिए पैसा लेते हैं। इसलिए बांग्लादेशियों के साथ-साथ इन एजेंट्स के नेटवर्क के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उनकी संपत्ति जब्त करके, उसे बेचकर, बांग्लादेशियों को अपने आप वापस लौटाने की पहल करनी चाहिए।
ये घुसपैठिए पूरे देश में फैले हुए हैं। ये भारत से पैसा कमाकर बांग्लादेश भेजते हैं, हमारे नागरिकों का हक़ मारते हैं, सरकारी योजनाओं का फायदा उठाते हैं। ये सिलसिला तभी बंद होगा जब इन्हें लाने ले जाने वाले एजेंट्स की धरपकड़ होगी। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 03 जून 2026 का पूरा एपिसोड







































