लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं ने सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर दिल्ली में मार्च निकाला। सैकड़ों समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ निकले विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग पर मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाने और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए। इस मामले में राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
कांग्रेस पार्टी की लीगल टीम ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें कुल 11 पिटीशनर्स हैं, जिसमें राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा इस याचिका में सौगत राय (TMC), अखिलेश यादव (SP), तेजस्वी प्रसाद यादव (RJD), संजय राउत (Shiv Sena-UBT), एम.ए. बेबी (CPI-M), डी. राजा (CPI), महुआ माजी (JMM), सुप्रिया सुले (NCP-SP) और ई.टी. मोहम्मद बशीर (IUML) शामिल हैं। खास बात ये है कि आम आदमी पार्टी की तरफ से इस पिटीशन में कोई नहीं है। वहीं, इस याचिका में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया, ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को रेस्पॉन्डेंट बनाया गया है।
राहुल गांधी की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका पर सोमवार को ही प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश रजिस्ट्री को दिया है। अदालत ने कहा कि याचिका में मौजूद खामियों को दूर किया जाए, ताकि मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करेगी। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया था कि सोमवार शाम तक याचिका दाखिल होने पर मामले को अगले दिन सुनवाई के लिए लिया जा सकता है।
याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। विपक्ष ने SIR की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है।
संविधान क्लब से निकला ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’
विपक्षी नेताओं ने अपने मार्च को ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में निकले इस मार्च में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, शशि थरूर, सचिन पायलट और मुकुल वासनिक के अलावा तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष भी शामिल हुईं।
मार्च में डी राजा, एमए बेबी, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, संजय राउत, दीपांकर भट्टाचार्य और ईटी मोहम्मद बशीर समेत INDIA ब्लॉक के कई घटक दलों के नेता मौजूद रहे। सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, नंदिता नारायण और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की प्रमुख नेहा बोरा ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
सभी नेता और समर्थक पहले संविधान क्लब में एकत्र हुए। इसके बाद वे चार एसी बसों से बाराखंभा रोड जंक्शन की ओर रवाना हुए और वहां से सुप्रीम कोर्ट की तरफ पैदल मार्च शुरू किया। हालांकि, पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर मार्च को रोक दिया। इस दौरान राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कुछ नेता एक वाहन के ऊपर चढ़ गए।
“इस्तीफा दीजिए, सरकारी गवाह बनिए”
मार्च से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने बीजेपी पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल उठाए और दावा किया कि पुलिसकर्मियों को युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि सरकार के भीतर के कुछ अधिकारी विपक्ष के साथ सूचनाएं शेयर कर रहे हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से इस्तीफा देने और कथित अनियमितताओं के पीछे मौजूद लोगों के बारे में जानकारी देने की अपील की। राहुल गांधी ने कहा, “इस्तीफा दीजिए, सरकारी गवाह बनिए। आपने गलती की है, लेकिन आप इस गलती के पीछे का दिमाग नहीं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और विपक्ष की लड़ाई उन ताकतों के खिलाफ है, जो उनके पीछे हैं।
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